Muscle Stiffness ।। सूजन, दर्द और मांसपेशियों में अकड़न । "चोक" हो चुकी नसों के 3 वफ़ादार साथी। इनसे घर बैठे कैसे राहत पाएँ ?

  1.  कौन है कॉलेस्ट्रोल और थ्रोम्बी का जानी दुश्मन और खून की नसों का सबसे वफ़ादार साथी ?


क् या शाम को आपके पैरों में सूजन आ जाती है ? क्या आपके पैरों के तलवे सूज गए हैं, पैर फूले रहते हैं और आपकी एड़ियों पर निशान आ गए हैं ? इसका अर्थ है कि आपको वैस्क्यूलर एडिमा है - इसमें कमजोर और चोक हो चुकी रक्त की धमनियों के चारों ओर रहने वाला तरल पदार्थ उनके अंदर प्रवेश कर जाता है। एडिमा से मांसपेशियों में दर्द होता है और वे अकड़ जाती हैं - यह रक्त के प्रवाह में बाधा पड़ने के कारण होता है ।

यह सब जानते हैं कि रक्त की धमनियों के कॉलेस्ट्रोल से चोक हो जाने के कारण ही लकवा और हार्ट अटैक की बीमारी होती है। ये सभी हृदय रोग हैं। लेकिन बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि समस्या इससे कहीं गहरी होती है। "चोक हो चुकी" नसें 10 में से 9 ऐसी लंबी पकड़ लेने वाली बीमारियों की जड़ होती हैं जिन्हें लाइलाज समझा जाता है ।
सरदर्द, ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होना। आपके जोड़ों में दर्द होता है और आप अपनी गर्दन या जोड़ों को बड़ी मुश्किल से ही घुमा पाते हैं। शाम को आपके पैरों में सूजन आ जाती है और सुबह आपका चेहरा फूल जाता है। आपको कानों में घंटियों की आवाज सुनाई देती है। आपकी उंगलियां सुन्न सी महसूस होती है और हाथ और पैर ठंडे लगते हैं। आपकी नज़र का पैनापन कम हो जाता है। मेमोरी भी खराब होने लगती है। आपके पास किसी भी चीज के लिए ऊर्जा नहीं बचती। कई लोग कहते हैं कि यह सब तो बुढ़ापे की निशानी होते हैं लेकिन यह बात सच नहीं है।


  • रक्त की धमनियाँ आपके 90% स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार क्यों होती हैं ?
  • कॉलेस्ट्रोल के अलावा रक्त की धमनियों की दीवारों पर और क्या जमा होता है ?
  • अस्वस्थ रक्त की धमनियों के चार प्रत्यक्ष और सात छिपे हुए लक्षण ।
  • क्या आप धमनियों को घर पर ही साफ कर सकते हैं ?           
हमें इन प्रश्नों के उत्तर यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसन एंड फार्मेसी, मुंबई में वैस्कुलर सर्जरी के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट, प्रोफेसर, न्यूरो सर्जन, डॉक्टर  ने दिए ।
 हमे इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि रक्त की धमनियाँ ही हमारे 90% स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार होती हैं, हमारा स्वास्थ्य और जिजीविषा इस बात पर निर्भर करती है ,कि ये कितनी साफ हैं।

रक्त की धमनियाँ हमारे 90% स्वास्थ्य के लिए क्यों जिम्मेदार होती हैं ?

जियाउल्लाह जी आपने कई मौकों पर कहा है कि रक्त की धमनियाँ ही मानव शरीर के 90% स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार होती हैं। ऐसा क्यों है ?

मानव शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग कौन सा है? बहुत कम ही लोग इसका उत्तर जानते हैं। यहां तक कि जिन लोगों ने मेडिकल साइंस की पढ़ाई की है वे भी इसका गलत जवाब देते हैं। ये दिमाग या लिवर का नाम लेते हैं। अधिक जानकार लोग कहते हैं कि यह हमारी त्वचा है। वास्तव में सबसे बड़ा अंग हमारा वैस्कुलर सिस्टम है।

हम 1 आदमी की धमनियों को

पूरी पृथ्वी को 2.5 बार लपेट सकते हैं।

    • जरा कल्पना कीजिए। यदि हमने किसी आदमी के शरीर से सभी धमनियाँ अलग करके उन्हें एक दूसरे से जोड़ दिया तो हमें एक ऐसी रस्सी मिलेगी जो करीब एक लाख किलोमीटर लंबाई की होगी।
आसान शब्दों में कहें तो- भूमध्य रेखा की लंबाई 40 हजार किलोमीटर है। इसलिए, एक आदमी की धमनियों से बनी रस्सी से हम पृथ्वी को 2.5 बार लपेट सकते हैं।
आप इस संख्या के बारे में क्या सोचते हैं?
धमनियाँं केवल ऐसी नालियाँ भर नहीं है जिनमें रक्त बहता है। यह बहुत ही अनोखा और जटिल अंग है और इसमें कोई भी विकार होने से तुरंत बीमारी के लक्षण उभरने लगते हैं।
पैरों की नसों का चोक हो जाना - वेरीकोज नसें, सूजन, पैरों में भारीपन, पैर जाम हो जाना या - तलवों में बहुत जलन होना। एढ़ियाँ फट जाना। रक्त प्रवाह में बाधा - बैक्टीरिया से कोई बचाव नहीं होता, मायकोसिस होने लगती है। नाखून मोटे होने लगते हैं और चमड़ी के अंदर बढ़ने लगते हैं।
लीवर को रक्त की सप्लाई करने वाली धमनियाँं कमजोर हो ।
जाती हैं - हैपेटिक स्टीटोसिस। आप जैसे ही कोई वसा वाले खाने खाते हैं तो मुंह में कड़वा स्वाद आने लगता है।
जोड़ों की धमनियाँ कमजोर हो जाती हैं और चोक होने लगती हैं - जोड़ों की हड्डियां सूख जाती हैं। जोड़ों में दर्द करने लगता है और आपको ओस्टियोनकोंड्रोसिस, हर्निया हो जाते हैं।
हाथों की नसों की लचक चली जाती है - हेमरॉयडल गांठे उभरने लगती हैं।
आंखों की नसें - नज़र खराब होने लगती है और मोतियाबिंद आने लगता है। आंखें लाल रहती हैं और हम समझते हैं कि यह थकान के कारण हो रहा है जबकि इसके पीछे होता है माइक्रोहेमरेज, इसमें आंखों के पीछे की छोटी-छोटी नसें फट जाती हैं।
मस्तिष्क में रक्त प्रवाह में बाधा - चक्कर आना, कान में आवाज सुनाई देना और मेमोरी चली जाना। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि आप किचन में कुछ लेने जाते हैं और याद ही नहीं रहता कि किस लिए आए थे? या फिर आपको कभी शब्द याद ही नहीं आते। ये सब इसके लक्षण है कि दिमाग की नसें खराब होने लगी है।

और हाई ब्लड प्रेशर भी इस लिस्ट में जुड़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर ही लकवे का कारण होता है और हार्ट अटैक लाने में भी इसका योगदान होता है।

 रक्त की धमनियाँ हमारी पावर सप्लाई हैं, हमारी जिंदगी इनमें ही बहती है। यदि यह महत्वपूर्ण रास्ता बंद हो जाता है तो जिंदगी भी बंद हो जाती है।

"चोक हो चुकी नालियाँ" - सभी अंगों की भूख।

मोटापे का रक्त की धमनियों से सीधा नाता है। कॉलेस्ट्रोल से चोक हो चुकी धमनियों से अंग भूखे रह जाते हैं, उन तक पोषक पदार्थों की आवश्यक मात्रा नहीं पहुंच पाती। दिमाग शरीर में यह संदेश भेजता है कि "आपको खाना खाना है"। और आदमी खाना खाने लगता है। लेकिन शरीर के अंगों को फिर भी उचित मात्रा में पोषक पदार्थ नहीं मिलते क्योंकि आपकी धमनियाँं तो चोक हो चुकी होती हैं। दिमाग फिर से यही सिग्नल भेजता है कि आपको खाना खाना है और यह चीज बार-बार ऐसे ही होती जाती है।

और इसी कारण कई लोगों को हमेशा कुछ ना कुछ खाने की इच्छा होती रहती है, आपको मिठाई या तली चीजों की भूख भी यहीं से आती है - शरीर कैलोरी मांगने लगता है।

जब मेरे साथ के डॉक्टर मरीजों को समझाते हैं: "आपका हाई ब्लड प्रेशर मोटापे के कारण है", तो लोग समझ ही नहीं पाते कि आखिर रोग की जड़ क्या है। हाई ब्लड प्रेशर मोटापे के कारण नहीं होता है, मोटापा हाई ब्लड प्रेशर के कारण होता है।

कहावत है "स्वास्थ्य अच्छा तो सब अच्छा", और इसमें यह भी जोड़ा जा सकता है कि: "साफ धमनियों के बिना अच्छा स्वास्थ्य असंभव है।"

 इसलिए मैं लगातार यही कहता हूँ: यदि आपको सामान्य जीवन चाहिए तो आपको अपनी धमनियाँ साफ और स्वस्थ बनाना ही होगा। साफ धमनियों से आप 90% लंबी बीमारियों से बच सकते हैं, जिनमें से अधिकतर को "लाइलाज" माना जाता है।

कॉलेस्ट्रोल के अलावा धमनियों को क्या चोक करता है ?
हम सब जानते हैं कि कॉलेस्ट्रोल कितना खतरनाक होता है। ये धमनियों को चोक कर देता है, उन्हें संकरा कर देता है और रक्त प्रवाह को बाधित करता है। लेकिन ये सिर्फ कॉलेस्ट्रोल के कारण नहीं होता है।
                            6.1 किग्रा
- 50 की उम्र तक धमनियों में जम चुके अपशिष्ट पदार्थों का कुल वजन।
                           कॉलेस्ट्रोल

यह सच है। धमनियों के अपशिष्ट में 65-70% कॉलेस्ट्रोल या "एथेरोस्क्लेरोटीक प्लाक़" ही होते हैं।

50 की उम्र तक, शरीर की नसों में 5 किलो तक कॉलेस्ट्रोल की पपड़ी जम जाती है। कॉलेस्ट्रोल के जमने से नसों की दीवार 4-5 गुना संकरी हो जाती है।

जरा सोचिए ।  यदि नस के अंदर का  व्यास एक उंगली के बराबर हो तो  5  किलो कॉलेस्ट्रोल की पपड़ी उसे  4 bमाचिस की  तीलियो के बराबर जगह जितना  संकरा कर देती  है ।

 ये पपड़ी जान के लिए खतरा नहीं होतीं। ज़िंदगी की गुणवत्ता खराब होने लगती है, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, सरदर्द, पीठ में दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन आने लगते हैं। नसों में जमने वाले थ्रोम्बी के थक्के इससे कहीं ज़्यादा खतरनाक होते हैं।

                       थ्रोम्बी का थक्का

नसों में जम चुके थ्रोम्बी का वजन काफी कम होता है, "केवल" 800 ग्राम - 1 किलो तक। लेकिन इनकी सबसे खतरनाक चीज होती है इनकी अस्थिरता। ये थ्रोम्बस (रक्त के थक्के) कभी भी टूट सकते हैं और फिर ये कहर ढा देते हैं।

एक बड़ा रक्त का थक्का रक्त की धमनी को पूरी तरह से चोक कर सकता है। इससे इस्कीमिया हो जाता है - अंग को इस धमनी से खून की आपूर्ति बंद हो जाती है।

इस्कीमिक स्ट्रोक - दिमाग की नस चोक हो जाना। हार्टअटैक - हृदय की नसों में रुकावट। लिवर का इस्कीमिया, फेंफड़े खराब हो जाना, किडनी पर ज़ोर पड़ना। बवासीर और कुछ नहीं गुदा का इस्कीमिया होते हैं। पैरों की छोटी नस में रुकावट से आगे चलकर नेक्रोसिस - या गैंगरीन हो जाता है।

                          कैल्सियम लवण

नसों में कैल्सियम लवण - दवाओं और फूड सप्लिमेंट के रासायनिक अवशेष। 50 साल में शरीर में करीब 300-400 ग्राम कैल्शियम लवण जमा हो जाते हैंकैल्सियम लवण की सबसे ज़्यादा मात्रा दिमाग की नसों में जमा होती है।

अपनी क्रिस्टल जैसी संरचना के कारण कैल्शियम लवण खतरनाक होते हैं। ये तुरंत धमनी को संकरा कर देते हैं जिससे वे अकड़ने लगती हैं। तनाव, शारीरिक मेहनत या मौसम के कारण कैल्शियम के पैने क्रिस्टल धमनियों की दीवार को तोड़ सकते हैं। दिमाग की नस के फट जाने को ही हेमोरेजिक स्ट्रोक कहते हैं।

अस्वस्थ धमनियों के चार प्रत्यक्ष और सात छिपे हुए लक्षण ।

ऐसे कौन से लक्षण हैं जो यह दर्शाते हैं कि हमारी धमनियाँ चोक हो गई हैं? जब आपका शरीर यह संदेश दे रहा हो कि " अपनी रक्त की धमनियों को तुरंत साफ करो!", तो इसे कैसे समझें ?

यदि आप 45 से ऊपर के हैं और धमनियों को साफ करने के लिए आपने कभी भी न्यूट्रास्यूटिकल्स नहीं लिए हैं तो मैं गारंटी देता हूं कि आपको धमनियों में दिक्कत आने वाली है।

                                  45

की उम्र ही वह पड़ाव है जिस पर धमनियों को साफ करना जरूरी होता है

धमनियों का कॉलेस्ट्रोल और रक्त के थक्के से चुप हो जाना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो उम्र के बढ़ने के साथ होती ही है। आधुनिक जमाने का खाना, दवाएँ, धूम्रपान और शराब पीने से इनका जमना 5-8 गुना तेज हो जाता है। यह एक कड़वी सच्चाई है जिससे मुंह नहीं फेरा जा सकता।

      धमनियों में अपशिष्ट जमने के मुख्य लक्षण

यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो इसे पढ़ना बंद कर दें क्योंकि यही धमनियों की बीमारियों का सबसे बड़ा लक्षण है।

क्या आपका ब्लड प्रेशर स्थिर नहीं रहता है? ब्लड प्रेशर दवाइयां लेने के बाद लगातार बढ़ा रहता है? यदि ऐसा है तो आपको यह जान लेना चाहिए कि आपकी धमनियों में केवल 30% खाली जगह बची है। बाकी की जगह में कॉलेस्ट्रोल की पपड़ी, रक्त के थक्के, थ्रोम्बी और कैल्शियम लवण जमा हो चुके हैं।

इसलिए, थोड़ा भी तनाव होने, मौसम में बदलाव होने, या मैग्नेटिक फील्ड के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण भी आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और आपको ऐसा लगता है मानो सिर में हथौड़े चल रहे हो और जोड़ों में दर्द होने लगता है।

चोक हो चुकी धमनियों के कारण होने वाली चार बीमारियां ।

  • 1. हाई ब्लड प्रेशरबढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर जिसे आप को दवा लेकर कम करना पड़ता है। यह इसका मुख्य लक्षण है। क्या आपको हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है? आपकी धमनियाँ सफाई का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं !
    • 2. वेरीकोज़ नसेंपैरों पर बदसूरत और सूजी हुई नसें दिखना,भारीपन और दर्द होना,सूजन आ जाना। कॉलेस्ट्रोल और रक्त के थक्कों के टुकड़े नसों के वाल्व बंद कर देते हैं। त्वचा के ऊपर से धमनियों का "तारों" जैसा आकार दिखना शुरू हो जाता है जो समय के साथ एक पूरा "जाल" बन जाता है। वेरीकोज़ नसें ऐसे ही शुरू होती हैं।
    • 3. हेमरॉयड्सगोदा में रक्त की नसों के चोक हो जाने के कारण हेमरॉयडल गठानों में दाह उत्पन्न होता है। रक्त की धमनियों में पपड़ी जम जाने के कारण फिशर भी होता है ।
    • 4. ऑस्टियोकॉन्ड्रिटिसजोड़ों में ठीक से रक्त का प्रवाह नहीं होना। इससे जोड़ कड़े हो जाते हैं और घिसने लगते हैं क्योंकि उन्हें वापस ठीक होने का समय ही नहीं मिलता। जोड़ वापस ठीक नहीं होते और सूख जाते हैं। इनका गद्दे जैसा प्रभाव कम पड़ जाता है। लवण बहते नहीं है और अनियंत्रित रूप से जमा होते चले जाते हैं ।

                    7 छिपे हुए लक्षण ।

  • 1. एडिमाचोक हो चुकी नसें खून को पंप नहीं कर पाती हैं। नमक और पानी का मेटाबॉलिज्म खराब हो जाता है। शाम को पैरों में सूजन आ जाती है और एड़ियों पर मोजों के गहरे निशान पड़ जाते हैं। सूजा हुआ चेहरा, आंखों के नीचे सूजन। आप अपनी उंगलियों में से अंगूठी नहीं उतार पाते हैं। फूला हुआ पेट भी यही दर्शाता है कि आप के अंदरूनी अंगों में सूजन आ गई है।
    • 2. कानों में आवाज आनाकानों में हल्की से लेकर तेज आवाजें तक आ सकती हैं जिनसे आपको ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है। यह दिमाग की नसों में दबाव बढ़ जाने के कारण होता है जिससे कान के पर्दे दबने लगते हैं।
    • 3. चक्कर आनाऐसा महसूस होना मानो नशा किया हो, कई बार अचानक सर घूमने लगना यही दर्शाता है कि धमनियों की प्रणाली भूख से परेशान है। इसके कारण कई बार सुनने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
    • 4. अनिद्राआपको दिन भर नींद आती रहती है और ऊर्जा की कमी महसूस होती है, लेकिन आप आधी रात के पहले सो भी नहीं पाते? इसलिए होता है क्योंकि पीयूष ग्रंथि में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती। ग्रंथि मेलाटोनिन बनाना बंद कर देती है - मेलाटोनिन ही नींद का हार्मोन होता है।
    • 5. ऊर्जा में कमीआपको कमजोरी महसूस होती है। आपको कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती। आपको बस ऐसा लगता है कि बिस्तर में पड़े रहो और खाते रहो। यह तब होता है जब शरीर ऊर्जा बचाने लगता है। चोक हो चुकी नसें अंगों के लिए आवश्यक भोजन का परिवहन नहीं करने देती जिससे शरीर अपनी क्रियाओं को धीमा कर देता है ताकि मृत्यु ना हो।
    • 6. नज़र कमजोर होने लगनाआंखों के सामने तारे दिखना, धब्बे नज़र आना, नज़र में धुंधलापन। आंखों की नसों में गड़बड़ियों के लक्षण
    • 7. जोड़ों में दर्दमौसम के बदलने पर जोड़ों में दर्द होना। अच्छी नींद होने के बाद भी सुबह सोकर उठने पर आपको ऐसा लगता है मानो हाथ पर जम गए हो, एढ़ियों में दर्द होता है। आपको सुन्न पड़ चुके हाथ-पैर वापस ठीक करने में थोड़ा समय लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर के सिनोवियल फ्लूड के गुणधर्म नष्ट हो जाते हैं।

    क्या आपको भी इनमें से कोई लक्षण है ? आपके जोड़ आपको बता रहे हैं कि उन्हें सफाई और भोजन की जरूरत है ।


    कई बार, लोगों को अलग-अलग तीव्रता में कई लक्षण एक साथ होते हैं। ऐसा भी होता है कि यह सारे लक्षण एक साथ दिख जाएं ।

    इससे परेशान लोग हर बीमारी को अलग-अलग ठीक करने की कोशिश करते हैं। हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयां, वेरीकोज नसों के लिए क्रीमें, हेमरॉयड्स के लिए दवाएं, ओस्टियोकांड्रोसिस के लिए जैल । और, लगभग सभी लोग दर्दनाशक दवाएं तो लेते ही हैं ...

    ऐसे लोग सिर्फ दवा कंपनियों की जेब में ढेरों पैसे भरते हैं । लेकिन धमनियों की सभी बीमारियों का केवल एक ही कारण होता है - रुकावट। इलाज की शुरुआत यहीं से करनी चाहिए और सबसे पहले धमनियों की सफाई होनी चाहिए ।

    आपको अपनी धमनियों में से कोलेस्ट्रॉल, रक्त के थक्के और पपड़ी की सफाई करने के लिए क्या उपयोग करना चाहिए ?

    कृपया हमें प्रोफेशनल सलाह दें। जैसे , सुनीता ओसवाल, नागपुर, 57 वर्ष, शादीशुदा हैं, उनका वजन ज्यादा है, उन्हें ब्लड प्रेशर और वेरीकोज नसों की भी शिकायत है। जब भी मौसम बदलता है उनका शरीर भी मानो बैरोमीटर के हिसाब से बदलने लग जाता है - जोड़ों में दर्द, कमजोर और दिन भर नींद आना, सरदर्द ।

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    The Medical Time



    Md Ziyaullah Shah

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