क् या शाम को आपके पैरों में सूजन आ जाती है ? क्या आपके पैरों के तलवे सूज गए हैं, पैर फूले रहते हैं और आपकी एड़ियों पर निशान आ गए हैं ? इसका अर्थ है कि आपको वैस्क्यूलर एडिमा है - इसमें कमजोर और चोक हो चुकी रक्त की धमनियों के चारों ओर रहने वाला तरल पदार्थ उनके अंदर प्रवेश कर जाता है। एडिमा से मांसपेशियों में दर्द होता है और वे अकड़ जाती हैं - यह रक्त के प्रवाह में बाधा पड़ने के कारण होता है ।
- रक्त की धमनियाँ आपके 90% स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार क्यों होती हैं ?
- कॉलेस्ट्रोल के अलावा रक्त की धमनियों की दीवारों पर और क्या जमा होता है ?
- अस्वस्थ रक्त की धमनियों के चार प्रत्यक्ष और सात छिपे हुए लक्षण ।
- क्या आप धमनियों को घर पर ही साफ कर सकते हैं ?
रक्त की धमनियाँ हमारे 90% स्वास्थ्य के लिए क्यों जिम्मेदार होती हैं ?
मानव शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग कौन सा है? बहुत कम ही लोग इसका उत्तर जानते हैं। यहां तक कि जिन लोगों ने मेडिकल साइंस की पढ़ाई की है वे भी इसका गलत जवाब देते हैं। ये दिमाग या लिवर का नाम लेते हैं। अधिक जानकार लोग कहते हैं कि यह हमारी त्वचा है। वास्तव में सबसे बड़ा अंग हमारा वैस्कुलर सिस्टम है।
पूरी पृथ्वी को 2.5 बार लपेट सकते हैं।
- जरा कल्पना कीजिए। यदि हमने किसी आदमी के शरीर से सभी धमनियाँ अलग करके उन्हें एक दूसरे से जोड़ दिया तो हमें एक ऐसी रस्सी मिलेगी जो करीब एक लाख किलोमीटर लंबाई की होगी।
"चोक हो चुकी नालियाँ" - सभी अंगों की भूख।
और इसी कारण कई लोगों को हमेशा कुछ ना कुछ खाने की इच्छा होती रहती है, आपको मिठाई या तली चीजों की भूख भी यहीं से आती है - शरीर कैलोरी मांगने लगता है।
कहावत है "स्वास्थ्य अच्छा तो सब अच्छा", और इसमें यह भी जोड़ा जा सकता है कि: "साफ धमनियों के बिना अच्छा स्वास्थ्य असंभव है।"
इसलिए मैं लगातार यही कहता हूँ: यदि आपको सामान्य जीवन चाहिए तो आपको अपनी धमनियाँ साफ और स्वस्थ बनाना ही होगा। साफ धमनियों से आप 90% लंबी बीमारियों से बच सकते हैं, जिनमें से अधिकतर को "लाइलाज" माना जाता है।
यह सच है। धमनियों के अपशिष्ट में 65-70% कॉलेस्ट्रोल या "एथेरोस्क्लेरोटीक प्लाक़" ही होते हैं।
50 की उम्र तक, शरीर की नसों में 5 किलो तक कॉलेस्ट्रोल की पपड़ी जम जाती है। कॉलेस्ट्रोल के जमने से नसों की दीवार 4-5 गुना संकरी हो जाती है।
जरा सोचिए । यदि नस के अंदर का व्यास एक उंगली के बराबर हो तो 5 किलो कॉलेस्ट्रोल की पपड़ी उसे 4 bमाचिस की तीलियो के बराबर जगह जितना संकरा कर देती है ।
ये पपड़ी जान के लिए खतरा नहीं होतीं। ज़िंदगी की गुणवत्ता खराब होने लगती है, ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, सरदर्द, पीठ में दर्द, कमजोरी और चिड़चिड़ापन आने लगते हैं। नसों में जमने वाले थ्रोम्बी के थक्के इससे कहीं ज़्यादा खतरनाक होते हैं।
थ्रोम्बी का थक्का
नसों में जम चुके थ्रोम्बी का वजन काफी कम होता है, "केवल" 800 ग्राम - 1 किलो तक। लेकिन इनकी सबसे खतरनाक चीज होती है इनकी अस्थिरता। ये थ्रोम्बस (रक्त के थक्के) कभी भी टूट सकते हैं और फिर ये कहर ढा देते हैं।
एक बड़ा रक्त का थक्का रक्त की धमनी को पूरी तरह से चोक कर सकता है। इससे इस्कीमिया हो जाता है - अंग को इस धमनी से खून की आपूर्ति बंद हो जाती है।
इस्कीमिक स्ट्रोक - दिमाग की नस चोक हो जाना। हार्टअटैक - हृदय की नसों में रुकावट। लिवर का इस्कीमिया, फेंफड़े खराब हो जाना, किडनी पर ज़ोर पड़ना। बवासीर और कुछ नहीं गुदा का इस्कीमिया होते हैं। पैरों की छोटी नस में रुकावट से आगे चलकर नेक्रोसिस - या गैंगरीन हो जाता है।
कैल्सियम लवण
नसों में कैल्सियम लवण - दवाओं और फूड सप्लिमेंट के रासायनिक अवशेष। 50 साल में शरीर में करीब 300-400 ग्राम कैल्शियम लवण जमा हो जाते हैं। कैल्सियम लवण की सबसे ज़्यादा मात्रा दिमाग की नसों में जमा होती है।
अपनी क्रिस्टल जैसी संरचना के कारण कैल्शियम लवण खतरनाक होते हैं। ये तुरंत धमनी को संकरा कर देते हैं जिससे वे अकड़ने लगती हैं। तनाव, शारीरिक मेहनत या मौसम के कारण कैल्शियम के पैने क्रिस्टल धमनियों की दीवार को तोड़ सकते हैं। दिमाग की नस के फट जाने को ही हेमोरेजिक स्ट्रोक कहते हैं।
अस्वस्थ धमनियों के चार प्रत्यक्ष और सात छिपे हुए लक्षण ।
ऐसे कौन से लक्षण हैं जो यह दर्शाते हैं कि हमारी धमनियाँ चोक हो गई हैं? जब आपका शरीर यह संदेश दे रहा हो कि " अपनी रक्त की धमनियों को तुरंत साफ करो!", तो इसे कैसे समझें ?
यदि आप 45 से ऊपर के हैं और धमनियों को साफ करने के लिए आपने कभी भी न्यूट्रास्यूटिकल्स नहीं लिए हैं तो मैं गारंटी देता हूं कि आपको धमनियों में दिक्कत आने वाली है।
45
की उम्र ही वह पड़ाव है जिस पर धमनियों को साफ करना जरूरी होता है
धमनियों का कॉलेस्ट्रोल और रक्त के थक्के से चुप हो जाना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो उम्र के बढ़ने के साथ होती ही है। आधुनिक जमाने का खाना, दवाएँ, धूम्रपान और शराब पीने से इनका जमना 5-8 गुना तेज हो जाता है। यह एक कड़वी सच्चाई है जिससे मुंह नहीं फेरा जा सकता।
धमनियों में अपशिष्ट जमने के मुख्य लक्षण
यदि आपको हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो इसे पढ़ना बंद कर दें क्योंकि यही धमनियों की बीमारियों का सबसे बड़ा लक्षण है।
क्या आपका ब्लड प्रेशर स्थिर नहीं रहता है? ब्लड प्रेशर दवाइयां लेने के बाद लगातार बढ़ा रहता है? यदि ऐसा है तो आपको यह जान लेना चाहिए कि आपकी धमनियों में केवल 30% खाली जगह बची है। बाकी की जगह में कॉलेस्ट्रोल की पपड़ी, रक्त के थक्के, थ्रोम्बी और कैल्शियम लवण जमा हो चुके हैं।
इसलिए, थोड़ा भी तनाव होने, मौसम में बदलाव होने, या मैग्नेटिक फील्ड के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण भी आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और आपको ऐसा लगता है मानो सिर में हथौड़े चल रहे हो और जोड़ों में दर्द होने लगता है।
चोक हो चुकी धमनियों के कारण होने वाली चार बीमारियां ।
- 2. वेरीकोज़ नसेंपैरों पर बदसूरत और सूजी हुई नसें दिखना,भारीपन और दर्द होना,सूजन आ जाना। कॉलेस्ट्रोल और रक्त के थक्कों के टुकड़े नसों के वाल्व बंद कर देते हैं। त्वचा के ऊपर से धमनियों का "तारों" जैसा आकार दिखना शुरू हो जाता है जो समय के साथ एक पूरा "जाल" बन जाता है। वेरीकोज़ नसें ऐसे ही शुरू होती हैं।
- 3. हेमरॉयड्सगोदा में रक्त की नसों के चोक हो जाने के कारण हेमरॉयडल गठानों में दाह उत्पन्न होता है। रक्त की धमनियों में पपड़ी जम जाने के कारण फिशर भी होता है ।
- 4. ऑस्टियोकॉन्ड्रिटिसजोड़ों में ठीक से रक्त का प्रवाह नहीं होना। इससे जोड़ कड़े हो जाते हैं और घिसने लगते हैं क्योंकि उन्हें वापस ठीक होने का समय ही नहीं मिलता। जोड़ वापस ठीक नहीं होते और सूख जाते हैं। इनका गद्दे जैसा प्रभाव कम पड़ जाता है। लवण बहते नहीं है और अनियंत्रित रूप से जमा होते चले जाते हैं ।
7 छिपे हुए लक्षण ।
- 2. कानों में आवाज आनाकानों में हल्की से लेकर तेज आवाजें तक आ सकती हैं जिनसे आपको ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है। यह दिमाग की नसों में दबाव बढ़ जाने के कारण होता है जिससे कान के पर्दे दबने लगते हैं।
- 3. चक्कर आनाऐसा महसूस होना मानो नशा किया हो, कई बार अचानक सर घूमने लगना यही दर्शाता है कि धमनियों की प्रणाली भूख से परेशान है। इसके कारण कई बार सुनने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
- 4. अनिद्राआपको दिन भर नींद आती रहती है और ऊर्जा की कमी महसूस होती है, लेकिन आप आधी रात के पहले सो भी नहीं पाते? इसलिए होता है क्योंकि पीयूष ग्रंथि में पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती। ग्रंथि मेलाटोनिन बनाना बंद कर देती है - मेलाटोनिन ही नींद का हार्मोन होता है।
- 5. ऊर्जा में कमीआपको कमजोरी महसूस होती है। आपको कुछ भी करने की इच्छा नहीं होती। आपको बस ऐसा लगता है कि बिस्तर में पड़े रहो और खाते रहो। यह तब होता है जब शरीर ऊर्जा बचाने लगता है। चोक हो चुकी नसें अंगों के लिए आवश्यक भोजन का परिवहन नहीं करने देती जिससे शरीर अपनी क्रियाओं को धीमा कर देता है ताकि मृत्यु ना हो।
- 6. नज़र कमजोर होने लगनाआंखों के सामने तारे दिखना, धब्बे नज़र आना, नज़र में धुंधलापन। आंखों की नसों में गड़बड़ियों के लक्षण
- 7. जोड़ों में दर्दमौसम के बदलने पर जोड़ों में दर्द होना। अच्छी नींद होने के बाद भी सुबह सोकर उठने पर आपको ऐसा लगता है मानो हाथ पर जम गए हो, एढ़ियों में दर्द होता है। आपको सुन्न पड़ चुके हाथ-पैर वापस ठीक करने में थोड़ा समय लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर के सिनोवियल फ्लूड के गुणधर्म नष्ट हो जाते हैं।
क्या आपको भी इनमें से कोई लक्षण है ? आपके जोड़ आपको बता रहे हैं कि उन्हें सफाई और भोजन की जरूरत है ।
कई बार, लोगों को अलग-अलग तीव्रता में कई लक्षण एक साथ होते हैं। ऐसा भी होता है कि यह सारे लक्षण एक साथ दिख जाएं ।
इससे परेशान लोग हर बीमारी को अलग-अलग ठीक करने की कोशिश करते हैं। हाई ब्लड प्रेशर की दवाइयां, वेरीकोज नसों के लिए क्रीमें, हेमरॉयड्स के लिए दवाएं, ओस्टियोकांड्रोसिस के लिए जैल । और, लगभग सभी लोग दर्दनाशक दवाएं तो लेते ही हैं ...
ऐसे लोग सिर्फ दवा कंपनियों की जेब में ढेरों पैसे भरते हैं । लेकिन धमनियों की सभी बीमारियों का केवल एक ही कारण होता है - रुकावट। इलाज की शुरुआत यहीं से करनी चाहिए और सबसे पहले धमनियों की सफाई होनी चाहिए ।
आपको अपनी धमनियों में से कोलेस्ट्रॉल, रक्त के थक्के और पपड़ी की सफाई करने के लिए क्या उपयोग करना चाहिए ?
कृपया हमें प्रोफेशनल सलाह दें। जैसे , सुनीता ओसवाल, नागपुर, 57 वर्ष, शादीशुदा हैं, उनका वजन ज्यादा है, उन्हें ब्लड प्रेशर और वेरीकोज नसों की भी शिकायत है। जब भी मौसम बदलता है उनका शरीर भी मानो बैरोमीटर के हिसाब से बदलने लग जाता है - जोड़ों में दर्द, कमजोर और दिन भर नींद आना, सरदर्द ।
दोस्तों अगर ये आर्टिकल्स आप को अच्छे लगे तो हमारे YouTube चैनल पे भी जा सकते है, धन्यवाद्
Md Ziyaullah Shah
Disclaimer: This story is auto - aggregated by a mobile dexktop program and has not been created or edited by The Medical Time. Publisher : Education House










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