मोतियाबिंद (रतौंधी)- के उपचार, लक्षण, निवारण - मोतियाबिंद कैसे होता है? Cataracts

 

Cataracts

      आंख के पीछे वाला दर्पण धुंधला हो जाता है, और यदि आप आंख में रोशनी डालें तो आंख का तारा सलेटी या सफेद रंग का दिखाई देता है । मोतियाबिंद बड़ी आयु वाले लोगों में आम है , लेकिन कभी - कभी यह शिशुओं को भी हो जाता है । मोतियाबिंद दवाओं से ठीक नहीं होता । आई ओ एल प्रतिरोपण वाली मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा से रोशनी वापिस आ सकती है ।


रतौंधी और शुष्क नेत्र प्रदाह ( जीरोसिस ) ( विटामिन ए की कमी ) 

              यह रोग 2 से 5 वर्ष के बच्चों में बहुत होता है । यह रोग विटामिन ' ए ' वाले आहारों को कम मात्रा में खाने से होता है । यदि शुरू में इसकी पहचान करके इलाज न किया जाये तो बच्चा इसके कारण बच्चा अंधा हो सकता है ।

इनके लक्षण :

  • शुरू में बच्चे को केवल रतौंधी होती है । वह अंधेरे में उतनी अच्छी तरह से नहीं देख सकता जितनी अच्छी तरह से दूसरे लोगों को दिखाई देता है । 
  • तब उसकी आंखें शुष्क होने लगती हैं ( जोरोसिस ) । आंखों का सफेद हिस्सा अपना रंग खोना शुरू कर देता है और उस पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं । 
  • आंखों में छोटे - छोटे बुलबुले ( धब्बों का चकत्ता ) बन सकते हैं । 
  • जैसे - जैसे रोग बढ़ता जाता है , स्वच्छमंडल भी शुष्क और रंगहीन बनता जाता है और उसमें छोटे - छोटे गड्ढे से बन जाते हैं । 
  • तब जल्दी ही स्वच्छमंडल नर्म हो सकता है , या फूल सकता है , या फट भी सकता है । प्रायः आंखों में पीड़ा नहीं होती । दृष्टिहीनता छूत के कारण या दूसरी किसी क्षति के कारण हो सकती है । 
  • शुष्क नेत्र प्रदाह ( जीरोसिस ) उस समय शुरू होता है या गंभीर रूप धारण करता है जब बच्चों को दस्त , काली खांसी या क्षयरोग जैसा कोई दूसरा रोग भी हो । सभी बीमार और कम वजन वाले बच्चों की आंखों की जांच करें ।
उपचार :

विटामिन - ए वाले आहारों की पर्याप्त मात्रा का सेवन करके जीरोसिस से बचा जा सकता है । निम्नलिखित करें: 

  • संभव हो तो शिशुओं को 2 वर्ष तक स्तनपान करायें । 
  • 6 मास की आयु के बाद शिशु को विटामिन - ' ए ' वाले ऊपरी आहार भी देने शुरू कर दें जैसे कि गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां , पीले और लाल रंग के फल और सब्जियां । संपूर्ण दूध , अण्डे , जिगर और गुर्दो में भी काफी मात्रा में विटामिन - ' ए ' होता है । 
  • यदि बच्चे को ये आहार नहीं मिलते या उसमें रतौंधी या जीरोसिस के लक्षण प्रकट होने लगे हैं तो उसे हर 6 माह में एक बार विटामिन - ए के 2 लाख यूनिट वाले कैप्सूल ( 60 मि.ग्रा . रेटिनोल ) दें । 6 मास से कम आयु वाले शिशु को ये कैप्सूल न दें । 
  • यदि स्थिति पहले से ही गंभीर हो चुकी हो तो बच्चे को 200,000 यूनिट का विटामिन ' ए का कैप्सूल दें । एक सप्ताह में आंखें ठीक न हों तो दूसरा कैप्सूल दें ।
चेतावनी !
             विटामिन - ' ए ' की अधिक मात्रा विष के समान होती है । एक सप्ताह में 200,000 यूनिट या , 1,000,000 यू ( 5 कैप्सूल ) से ज्यादा विटामिन न दें । 

     यदि बच्चे की आंखों की स्थिति गंभीर है- स्वच्छमंडल रंगहीन या गढ्ढेदार हो गया है या फूला हुआ है तो डाक्टरी सहायता लें । बच्चे की आंखों पर पट्टी बांधनी चाहिए और साथ ही उसे विटामिन ' ए ' दिया जाना चाहिए बेहतर हो कि 1,00,0000 यूनिट का टीका लगायें ।
           हमने आपको बेहतरीन और आसान सब्दो में समझा दिया हूं , उम्मीद करता हूं आप को ये जानकारी बहुत काम आएगी । धन्यवाद!

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