एक चुटकी भर बचाव का महत्व एक मुट्ठी भर उपचार के बराबर होता है ।
यदि हम सभी खाने-पिने और , अपनी तथा अपने घरों और अपने गांवों की स्वच्छता व बच्चों को लगने वाले टीकों का ध्यान रखें तो हम बहुत - सी बीमारियों को शुरू होने से पहले ही रोक सकते हैं , जी हां रोक सकते हैं ।
स्वच्छता और समस्याएं ;
जो सफाई के अभाव में खड़े रहते हैं वे स्वच्छ हैं ।
स्वच्छता कई प्रकार के इनफ़ेक्शन (संक्रामक) रोगों जैसे - आंत, त्वचा, आंखों, फेफड़ों और पूरे शरीर में इनफ़ेक्शन से बचाने में बहुत महत्वपूर्ण है।
स्वच्छता के प्रकार :
व्यक्तिगत स्वच्छता ( सफाई ) और सार्वजनिक सफाई ( सेनिटेशन ) ये दोनों ही महत्वपूर्ण हैं ।
- रोज़ाना सफाई ।
- साप्ताहिक सफाई ।
- मासिक सफाई ।
- सालाना सफाई ।
- एकाएक सफाई (Accidental) ।
अब आगे बढ़ते हैं ,
आंत की अधिकतर आम बीमारियां एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में घटिया साफ - सफाई और घटिया स्वच्छता के कारण फैलती हैं । संक्रमित लोगों के मल अथवा पखाने ( टॉयलेट ) से हजारों रोगाणु तथा आंतकृमि ( या उनके अंडे ) फैलते हैं ।
यह जीवाणु एक व्यक्ति से दूषित मल से हाथों की अंगुलियों , संदूषित भोजन या पानी के द्वारा मुंह के अंदर पहुंच कर बीमार बनाते हैं।मल से मुंह तक पहुंचने वाली निम्न बीमारियों हो सकती हैं ।👇
- आंतों के कृमि ( विभिन्न प्रकार के )
- दस्त , पेचिश ( अमीबा और परजीवियों द्वारा फैलते हैं )
- हैजा , टायफायड ज्वर और हैपाटाइटिस ।
- पोलियो जैसी कुछ अन्य बीमारियां कभी - कभी इसी तरह फैलती हैं ।
इन फैलने वाले रोगों का फैलने का तरीका बहुत ही सीधी हो सकती है ।
उदाहरण के लिए मान लीजिए कि एक ऐसा बच्चा जिसके पेट में कृमि है , पखाना जाने के बाद साबुन से हाथ धोना भूल जाये और बाद में उन्हीं हाथों से अपने किसी मित्र को बिस्कुट दे दे ।
🤝उसकी उंगलियों में पखाने के कारण कृमियों के सैंकड़ों छोटे - छोटे अंडे भी होंगे ( वे इतने छोटे होते हैं कि आंखों से देखें ही नहीं जा सकते ) ।
🤭इनमें से कुछ अंडे बिस्कुट पर भी लग जाते हैं । जब उसका मित्र उस बिस्कुट को खाता है तो वह उन अंडों को भी बिस्कुट के साथ ही निगल जाता है ।
😠जल्दी ही उस मित्र को भी कृमि - रोग हो जाएगा ।
और उसकी मां कहे गी कि बच्चा मिठाइयां ज्यादा खाता है 😂 , इसलिए उसके पेट में कृमि हुए हैं ।
😠लेकिन सच्चाई कुछ और ही है क्योंकि उसके पेट में मल ( टट्टी ) गया था इसलिए उसे यह रोग हुआ ।
चलिए मान लीजिए की ;
1. एक व्यक्ति को दस्त लगे हुए हैं या उसे कृमि रोग है और वह अपने घर के पीछे बैठकर टट्टी करता है । 🤭
2. और उसका एक कुत्ता घर के पीछे जाकर उस टट्टी को खाता है जिससे उसकी नाक और पांव गन्दे हो जाते हैं । 😠
3. तब वही कुत्ता घर के अन्दर चला जाता है ।🏡
4. घर में एक बच्चा जमीन पर बैठा खेल रहा है इस तरह उस व्यक्ति की टट्टी का कुछ - न - कुछ अंश उस बच्चे को भी लग जाता है । 🐒
5. बाद में जब बच्चा किसी कारण से रोने लगता है तो मां उसे अपनी गोद में उठा लेती है । 🤱
6. तब मां खाना बनाने लगती है , बच्चे को उठाने के बाद वह हाथ धोना भूल जाती है ।
7. यह खाना पूरा परिवार खाता है । 🤭👪
8. इस तरह जल्दी ही सारे परिवार को अतिसार दस्त ) या कृमि रोग हो जाता है ।
अब तो आप समझ ही गए होंगे और आगे पढ़ते है जानकारी के लिए ।
कई बार कुत्ते , सूअर , मूर्गियां और दूसरे पशु भी आंत के रोग और कृमियों के अंडे फैलाने के कारण बनते हैं । उदाहरण के लिए ।
यदि परिवार ने निम्नलिखित में से कोई भी अथवा पूरी सावधानी बरती होती तो इस बीमारी को फैलने से रोका जा सकता था ।
- यदि व्यक्ति ने शौचालय या आउटहाउस का इस्तेमाल किया होता ।
- यदि वहां कोई शौचालय नहीं था तो व्यक्ति ने अपने मल को मिट्टी से ढक दिया होता ।
- यदि परिवार ने सूअर को घर के अन्दर न आने दिया होता ।
- यदि परिवार ने बच्चे को उसी स्थान पर न खेलने दिया होता जहां सूअर घूम रहा था ।
- यदि मां ने बच्चे को उठाने के बाद और खाना बनाने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धोया होता ।
मक्खियां और दूसरे कीड़े - मकोड़े भी पाचन संबंधी कई छुतहा रोग फैलाते हैं । उदाहरण के लिए ;
1. हैजे से पीडित व्यक्ति अपने घर के पास ही करता है ।
2. मक्खियां टट्टी पर बैठती हैं और इसके कारण हैजे के जीवाणु मक्खियों की टांगों पर चिपक जाते हैं ।
3. इनमें से कुछ मक्खियां रसोई में उड़ कर जाती हैं
4. मक्खियां भोजन पर बैठकर अपनी टांगों को रगड़ती हैं ।
5. और पूरा परिवार उस भोजन को खाता है ।
इसलिए हमारे पूरे आवास और आस - पास को साफ रखनी चाहिए ।
यदि इन लोगों ने निम्नलिखित में से कोई भी सावधानी बरती होती तो हैजा फैलने से रोका जा सकता था ।
- यदि व्यक्ति ( और दूसरे रोगियों ) ने शौचालय या आउटहाउस का इस्तेमाल किया होता ।
- यदि शौचालय नही था तो उन्हें अपनी टट्टी ( मल ) को मिट्टी से ढक देना चाहिए था ।
- यदि भोजनको रसोई में अच्छी तरह से ढक कर रखा जाता ।
- यदि दुकान में मिठाइयों को ढक कर रखा जाता ।
- यदि बच्चे ने बिना ढकी मिठाईन खरीदी होती ।
मक्खियों द्वारा फैलाये जाने वाले हैजा तथा दूसरे रोगों से बचने के लिए हम क्या करें ;
- यदि संभव हो तो रसोईघर के दरवाजे और खिड़कियों पर लोहे की पतली जाली लगा दें ताकि मक्खियां अन्दर न जा सकें ।
- अपने पर्यावरण को साफ सुथरा रखें ।
- भोजन और पानी को ढक कर रखें ।
दूषित पानी पीने से भी पाचन - संबंधी कई बीमारियां हो जाती हैं ।
👉यदि अतिसार ( दस्त ) , कृमि तथा अन्य आंत की संक्रामक के रोग आम होने लगें तो समझना चाहिए कि वहां स्वच्छता की ओर पूरा ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।
👉यदि कहीं अतिसार ( दस्त ) के कारण बहुत से बच्चों की मृत्यु हो जाती है तो इसका मतलब है कि वहां दूसरी किसी समस्या के साथ - साथ कुपोषण भी एक बड़ा कारण है ।
👉आंत संबंधी छूतहा रोगों के कारण होने वाली मृत्यु से बचने के लिए स्वच्छता और पोषण , दोनों का बहुत ज्यादा महत्व है ( संबंधित अध्याय देखें ) ।
सीधे संपर्क से लगने वाले संक्रामक रोग :
मान लीजिए कि ;
- एक लड़के को खारिश ( खुजली ) है ।
- वह अपने भाई के साथ एक ही बिस्तर पर सोया ।
- अब उसके भाई को भी खुजली हो गयी है ।
- अगले दिन मां ने लड़के का कंबल ओढ़ लिया ।
- उसे भी खुजली हो गयी ।
- छोटा बच्चा रोने लगा तो मां ने उसे गोद में उठा लिया ।
और इसी तरीके से पुरे परिवार में फैल जाती है ।
यदि उस लड़के और उसके परिवार ने निम्नलिखित में से कोई भी सावधानी बरती होती तो खुजली को फैलने से रोका जा सकताथा ।
- यदि लड़का घर में अलग सोता और स्कूल में अलग बैठता ।
- यदि पूरा परिवार तभी अपना इलाज करवाना शुरू कर देता जब उन्हें मालूम हो गया था कि लड़के को खुजली है ।
- यदि वे अपने कपड़ों को लगातार धोते और खुली धूप में सुखाते ।
यौन रोग भी सीधे यौन संपर्क के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलते हैं।
उदाहरण के लिए:
सभी यौन रोग यौन संपर्क के माध्यम से प्रसारित होते हैं।
यदि आपको यह लगे कि उसको यौन रोग है तो आप उसका उपचार करवाएं और उसे यह बताएं कि वह कभी भी गैर औरत के साथ बिना निरोध के यौन सम्पर्क स्थापित न करें ।
एड्स ( एक्वायर्ड इम्यून डिफिसिएंसी सिंड्रोम ) भारत में फैलने वाला नया रोग है , यह रोग प्रायः यौन संपर्क के द्वारा फैलता है ।
इस समय भारत में लगभग कुल जनसंख्या लगभग 0.26 प्रतिशत (2.1 मिलियन) है। एड्स फैलाने वाले विषाणुएच. आई.वी . ( ह्यूमन इम्युनो डिफिसिएंसी वायरस ) से प्रभावित हैं ।
इनमें से बहुत से लोगों को यह नहीं मालूम कि वे इस वायरस से ग्रस्त है जबकि वे इस वायरस को फैला सकते हैं ।
एड्स का कोई इलाज नहीं है । केवल बचाव ही एक मात्र उपाय है । अधिक जानकारी हेतु पृष्ठ 300 देखें ।
तो दोस्तो हमे बहुत सी जिमेदारियों को बा खूबी निभानी चाहिए के समस्त भारत स्वच्छ हो और उसके साथ साथ हम लोग भी धन्यवाद कृपया इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें अगर आपको पसंद आई हो तो ।
कॉमेंट जरूर कीजिएगा ताके इससे आगे और लिखूं




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