प्रभावशाली व्यक्ति कैसे बने - How to be an influential person. प्रभावशाली व्यक्ति लोगों को पोषण देता है। how to build trust in people?


कई मामलों में लोग भी ठीक उसी तरीके सेे प्रतिक्रिया करते हैं, जिस तरह से जानवर करते हैं। और जानवरों की तरह ही लोगों को भी ध्यान रखें जाने की जरूरत होती हैै, सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि भावनात्मक भी। अगर आप चारों तरफ देखें तो आप पाएंगे कि आपके आस-पास ऐसे लोग हैं, जो पोषण देना कहते हैं , और यह हर इंसान की ज़रूरत है । 

          अगर आप दूसरों के जीवन में प्रभावकर्ता बनना चाहते हैं , तो उन्हें पोषण देने से शुरुआत करें । कई लोगों को यह गलतफ़हमी होती है कि प्रभावकर्ता बनने का तरीक़ा कुर्सी पर बैठने वाला व्यक्ति बनना है - दूसरों की ग़लतियाँ सुधारना है , उन कमज़ोर क्षेत्रों को उजागर करना है , जिन्हें वे खुद आसानी से नहीं देख सकते और उनकी तथाकथित रचनात्मक आलोचना करना है । परंतु धर्मगुरु जॉन नॉक्स ने चार सौ से अधिक साल पहले जो कहा था , वह आज भी सच है : “ आप विरोधी बनाने और प्रभावित करने का काम एक ही समय में नहीं कर सकते । 



            दूसरों की वास्तविक परवाह करना पोषण की प्रक्रिया के मूल में है । जब आप पोषण शब्द सुनते हैं , तो आप सबसे पहले किस चीज़ के बारे में सोचते हैं ? अगर आप आम लोगों की तरह हैं , तो आप शायद माँ द्वारा बच्चे को झूला झुलाने की कल्पना करते हैं । माँ अपने बच्चे का ध्यान रखती है , उसकी रक्षा करती है , उसे भोजन देती है , उसे प्रोत्साहित करती है और यह सुनिश्चित करती है कि उसकी ज़रूरतें पूरी हों । वह उसकी तरफ़ सिर्फ उसी समय ध्यान नहीं देती है , जब उसके पास खाली समय हो या जब यह उसके लिये सुविधाजनक हो । वह उससे प्रेम करती है और चाहती है कि वह फले - फूले।  

इसी तरह , जब आप अपने आसपास के लोगों की सहायता करना चाहते हैं और उन्हें प्रभावित करना चाहते हैं , तो आपके मन में उनके प्रति सकारात्मक भावनायें और परवाह होना चाहिये । अगर आप उन पर सकारात्मक प्रभाव डालना चाहते हैं , तो आप उन्हें नापसंद नहीं कर सकते , उनसे नफरत नहीं कर सकते या उनकी आलोचना नहीं कर सकते । आपको उन्हें प्रेम और सम्मान देना होगा । या जैसा मानवीय संबंधों के विशेषज्ञ लेस गिबलिन कहते हैं , “ अगर आप गोपनीय रूप से यह महसूस करते हों कि सामने वाला महत्वहीन है , तो आप अपनी उपस्थिति में उसे महत्व का एहसास नहीं करा सकते ।

अगर आप दुसरों को पोषण देते हैं, परंतु उन्हें स्वयं पर निर्भर बनाते हैं, तो उनकी मदद करने के बजाय दर असल आप उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैैं।

आप सोच रहे होंगे कि जिन लोगों को आप प्रभावित करना चाहते हैं , उनके साथ मैं आपको पोषक की भूमिका निभाने के लिये क्यों कह रहा हूँ , खासकर तब , जब वे परिवार के सदस्य न होकर कर्मचारी , सहकर्मी या मित्र हों । आप खुद से पूछ रहे होंगे , क्या यह ऐसी चीज़ नहीं है , जो उन्हें कहीं और मिल सके , उदाहरण के तौर पर , उनके घर में ? दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई यह है कि अधिकांश लोग प्रोत्साहन के बहुत भूखे हैं । और भले ही उनके जीवन में कुछ लोगों ने उनके विकास पर ध्यान दिया हो , फिर भी आपको उनका पोषण करने की ज़रूरत है , क्योंकि लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित उससे होते हैं , जो उन्हें उनके बारे में सर्वश्रेष्ठ अनुभव कराता है । अगर आप दूसरों के जीवन में प्रमुख पोषक बन जाते हैं , तब आपके पास उन पर अधिक प्रभाव डालने का अवसर होगा ।

 जब आप दूसरों की मदद करें और उन्हें प्रोत्साहित करें , तो अपने उद्देश्यों की जाँच करें और ऐसा बार - बार करें । एमिली नाम की छोटी लड़की की तरह न बनें । एक रविवार को उसके पिता गाई बेलेरेन्टी अपने परिवार को चर्च से घर ला रहे थे , तभी यह पाँच साल की लड़की बोली , " बड़े होकर मैं उस आदमी की तरह बनना चाहती हूँ , जो सामने खड़ा था ।

 " एमिली की माँ ने पूछा , “ तुम पादरी बनना चाहती हो ? " एमिली ने जवाब दिया , “ नहीं । मैं लोगों को यह बताना चाहती हूँ कि उन्हें क्या करना चाहिये ।

  आपका लक्ष्य दूसरों का विकास और स्वतंत्रता है । अगर आप दूसरों को पोषण देते हैं , परंतु उन्हें स्वयं पर निर्भर बनाते हैं , तो उनकी मदद करने के बजाय दरअसल आप उन्हें नुक़सान पहुंचा रहे हैं । और अगर आप अपनी आवश्यकतायें पुरी करने की इच्छा के कारण या अपने अतीत के घावों को भरने के लिए उनकी मदद कर लेते हैं, तो आपके साथ उनका बंधन निर्भरता ( Co-dependence) क्या बन सकता है अपने व्यक्तिगत इतिहास को दूसरों के द्वारा जिगर सुधारना तथा उसे पुनः जीना स्वास्थ्य नहीं है। इसके अलावा सह-निर्भर लोग कभी दूसरों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव करता नहीं बन सकते।

प्रेम के बिना कोई संबंध, कोई भविष्य और कोई सफलता शाझी नहीं होगी।

दूसरों पर हमारे प्रभाव की लंबाई - चौड़ाई का सीधा संबंध उनके प्रति हमारी चिंता की गहराई से होता है । जब दूसरों के विकास में मदद करने और उनके बारे में अच्छा महसूस करने की बात आती है , तो प्रेम का कोई विकल्प नहीं है । ग्रीन बे पैकर्स के महान कोच विंस लॉम्बार्डी जैसे कठोर व्यक्ति भी प्रेम की शक्ति को समझते थे , जिससे लोगों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाना और उनके जीवन पर प्रभाव डालना संभव था । उन्होंने कहा , “ अच्छे क्लबों में बहुत से कोच हैं , जो मूलभूत बातें जानते हैं और खिलाड़ियों को बहुत अनुशासित रखते हैं , परंतु इसके बावजूद वे मैच नहीं जीत पाते । फिर आप तीसरे तत्व पर आते हैं : अगर आपको एक टीम के रूप में साथ - साथ खेलना है , तो आपको एक - दूसरे की परवाह करना होगी । आपको एक - दूसरे से प्रेम करना होगा । हर खिलाड़ी को दूसरे खिलाड़ी के बारे में सोचना होगा । 

     लोगों को पोषण देकर आप उन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस व्यवसाय में हैं या आपके आसपास के लोग कितने सफल हैं या उन्होंने अतीत में क्या उपलब्धियाँ  हासिल की हैं । हर व्यक्ति महत्वपूर्ण अनुभव करना चाहता है । यहाँ तक कि जिसे कभी मुक्त जगत का लीडर समझा जाता था , उसे भी प्रेम की जरूरत थी । अपनी पुस्तक इन व एरीना में पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने बताया है कि व्हाइट हाउस से इस्तीफा देने के बाद जब उनका ऑपरेशन हुआ , तो वे अवसादग्रस्त थे । जब वे अस्पताल में थे , तो एक समय ऐसा आया , जब उन्होंने अपनी पत्नी कहा कि वे मरना चाहते हैं ।

   जब वे अपने जीवन के सबसे निराशाजनक मोड़ पर थे , तो अस्पताल की एक नर्स उनके कमरे में आई । उसने पर्दे खोले और एक छोटे हवाई जहाज़ की तरफ़ इशारा किया , जो ऊपर इधर से उधर उड़ रहा था । इस पर एक साइनबोर्ड लटक रहा था : ईश्वर तुमसे प्रेम करता है और हम भी । धर्मप्रचारक बिली ग्राहम की पत्नी रूथ ग्राहम ने यह व्यवस्था की थी कि हवाई जहाज़ अस्पताल के पास से उड़े । यह देखकर निक्सन को बदलाव के क्षण का एहसास हुआ । प्रेम की अभिव्यक्ति देखने के बाद उन्हें हौसला मिला , ठीक होने तथा आगे बढ़ने की इच्छा जाग्रत हुई ।

       अपने करीबी लोगों के प्रति प्रेम और सराहना व्यक्त करने का समय निकालें । उन्हें बतायें कि वे आपके लिये कितना मायने रखते हैं । उन्हें पत्र लिखकर बतायें कि आपको उनकी कितनी परवाह है । उनकी पीठ ठोंके और जब उचित हो , तो उन्हें गले भी लगायें । कभी यह सोचकर चुप न बैठे कि लोग यह जानते होंगे कि आप उनके बारे में कैसा सोचते हैं । उन्हें बता दें । किसी को भी यह बार बार सुनने में तकलीफ़ नहीं होगी कि उससे प्रेम किया जाता है।

                        उन्हें क्या मिलता है। 

             पोषक बनने के लिये दूसरों के बारे में सोचना सीखें । अपने बारे में सोचने के बजाय दूसरों को पहले स्थान पर रखें । दूसरों को सही जगह दिखाने के बजाय खुद को उनकी जगह पर रखने की कोशिश करें । यह हमेशा आसान नहीं होता । जब आपको खुद के बारे में और अपने व्यक्तित्व के बारे में शांति का एहसास हो , सिर्फ तभी आप दूसरों के बारे में सोचने में समर्थ हो पायेंगे , सिर्फ तभी आप दूसरों को अपना उपहार दे पायेंगे । परंतु पोषण के पुरस्कार बहुत हैं । जब आप लोगों को पोषण देते हैं , तो उन्हें कई चीजें मिलती हैं ।  

स्वाभाविक पोषक कैसे बना जाते ?


यह संभव है कि आप पोषक व्यक्ति के रूप में पैदा न हुए हों । कई लोगों को दूसरों से प्रेम करना और उनके प्रति सकारात्मक होना कठिन लगता है , खासकर तब जब वे ऐसे माहौल में बड़े हुए हों , जो बहुत | प्रेरणादायी न हो । परंतु हर व्यक्ति पोषक बन सकता है और दूसरों के मूल्य  । यह का में वृद्धि कर सकता है । अगर आप दूसरों का ध्यान रखने का सकारात्मक नज़रिया विकसित करते हैं , तो आप भी स्वाभाविक पोषक बन सकते हैं और दूसरों के जीवन में प्रभाव के अतिरिक्त अधिकार का आनंद ले सकते हैं । रहा ऐसा करने का तरीका :

  •  संकल्प लें । पोषक बनने का संकल्प लें । लोगों की मदद करने संकल्प लेने से आपकी प्राथमिकतायें और आपके कार्य बदल जाते हैं । दूसरों के प्रति प्रेम हमेशा मदद करने के तरीके खोज लेता है , दूसरों के प्रति उदासीनता को बहानों के सिवाय कुछ नहीं मिलता ।
  •  उन पर विश्वास करें । लोग अपने करीबी लोगों की आशाओं को पूरा करने के लिये या तो ऊपर उठते हैं या नीचे गिरते हैं । अगर आप लोगों को अपना विश्वास और आशा देंगे , तो वे आपको निराश न करने के लिये अपनी तरफ़ से हरसंभव कोशिश करेंगे ।
  •  उनके लिये सुलभ रहें । आप किसी को दूर रहकर पोषण नहीं दे सकते । आप ऐसा सिर्फ़ क़रीब आकर कर सकते हैं । जब आप लोगों के साथ यह प्रक्रिया शुरू करेंगे , तो शुरुआत में आपको उनके साथ बहुत समय बिताने की ज़रूरत होगी । परंतु जब उनको खुद में और रिश्ते में विश्वास हो जायेगा , तो उन्हें अधिक व्यक्तिगत संपर्क की आवश्यकता नहीं होगी । जब तक वे उस बिंदु पर न पहुँच जायें , तब तक यह सुनिश्चित करें कि वे आपसे सहजता से मिल सकें ।
  • विना बंधन के दें । अगर आपको लोगों की ज़रूरत है , तो आप उनका नेतृत्व नहीं कर सकते । पोषण लीडरशिप का एक महत्वपूर्ण पहलू है । इसके माध्यम से लाभ उठाने की कोशिश करने और बदले में कुछ हासिल करने की आशा के बिना मुक्तता से दें । उन्नीसवीं सदी के अर्थशास्त्री हेनरी ड्रमन्ड ने बुद्धिमत्तापूर्वक कहा था , “ जब आप अपने जीवन में पीछे की ओर मुड़कर देखेंगे , तो पायेंगे कि जिन क्षणों को आपने सचमुच जिया है , वे ऐसे पल थे जब आपने प्रेम की भावना से काम किया था ।
  •  उन्हें अवसर दें । जिन लोगों को आप पोषण देते हैं , जब उन्हें शक्ति हासिल हो जाये , तो उन्हें सफल होने और विकास करने के अतिरिक्त अवसर दें । आप उन्हें पोषण देना जारी रखें , परंतु जैसे - जैसे समय गुज़रेगा है , उनके काम और उपलब्धियाँ सुरक्षित , सम्मानित और प्रोत्साहित बने रहने में उनकी मदद करेंगी ।
  • उन्हें अधिक ऊँचे स्तर तक उठायें । आपका अंतिम लक्ष्य हमेशा यह होना चाहिये कि लोगों को अधिक ऊँचे स्तर तक ले जायें और उन्हें उनकी पूरी क्षमता तक पहुँचाने में मदद करें । पोषण वह आधार है , जिस पर वे खुद को महान बनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं ।
प्रभाव की जांच सुची, दुसरों को पोषण देने।
  • अपने घर , ऑफिस या चर्च में पोषक माहौल विकसित करें । अपने आस - पास के लोगों को यह एहसास दिलाने को अपना लक्ष्य बना लें कि उनसे प्रेम किया जा रहा है , उन्हें सम्मान दिया जा रहा है और वे सुरक्षित हैं । ऐसा करने के लिये एक महीने तक अपनी भाषा से हर तरह की नकारात्मक आलोचना को ख़त्म करने और दूसरों के बारे में सिर्फ सकारात्मक बातें खोजने का संकल्प लें ।
  •  विशेष प्रोत्साहन दें । इस माह प्रोत्साहित करने के लिये दो या तीन व्यक्तियों को चुन लें । हर सप्ताह प्रत्येक व्यक्ति को हाथ से लिखा एक छोटा पत्र भेजें । बदले में कुछ हासिल करने की आशा के बिना इन लोगों को अपने से मिलने का भरपूर समय व छूट दें । महीने के अंत में उनके साथ अपने रिश्तों में हुए सकारात्मक परिवर्तन की जाँच करें ।
  •  पुल दुबारा बनायें । किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचें , जिसके प्रति आप अतीत में नकारात्मक रहे थे । ( यह कोई भी हो सकता है : आपका सहकर्मी , परिवार का सदस्य , कर्मचारी , आदि । ) उस व्यक्ति के पास जायें और अपने पिछले कामों या बातों के लिये क्षमा माँगें । फिर वह गुण खोजें , जिसे आप उस व्यक्ति में सबसे अधिक पसंद करते हों और उसे इसके बारे में बतायें । अगले सप्ताहों के दौरान संबंध बनाने और उसे मज़बूत करने के तरीके खोजें। 

Md Ziyaullah Shah

Disclaimer: This story is auto - aggregated by a mobile dexktop program and has been created or edited by The Medical Time. Publisher : Education House


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