Kidney disease || किडनी ख़राब होने के लक्षण, कारण और चरण #JahanDoctorNaHo


मानव शरीर में किडनी बहुत महत्वपूर्ण अंग है, शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए किडनी का बहुत बड़ा योगदान रहता है। आज-कल के समय में जीवनशैली के बदलते प्रभावों को देखते हुए लोगों में पहले की तुलना में ज्यादा पनपने लगीं हैं। ऐसे लोग आज यह जानना चाहते हैं कि Kidney Fail यानि किडनी ख़राब होने के लक्षण, कारण और चरण क्या होते हैं।

अगर आप इन समस्याओं को शुरु होने से पहले ही पहचान लेतें हैं, तो समय से पहले ही इलाज करना भी सरल हो जाता है। अगर आपके मन में भी किडनी खराब होने को लेकर कोई शक या शंका है, तो दोस्तों वे इस आर्टिकल के माध्यम से दूर हो जाएँगी।
सो हेलो गाइस पहले हम जानेंगे किडनी खराब होने के लक्षण क्या है।
किडनी शरीर का इतना मजबूत अंग है कि जब तक 70 से 80% तक काम करना बंद ना कर दे तो हमें पता ही नहीं चलता ।
हालांकि छोटे-मोटे लक्षण सामने आते हैं जिन्हें हम सामान्य समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं कोई संभव जांच या डॉक्टर को दिखाना चाहिए ‌।
सामान्यतः किडनी की विफलता को दो मुख्य भागों में बांटा गया है, 
1. एक्यूट किडनी इंजुरी, (AKI) और इसे हम हिंदी में अल्पकालीन किडनी विफलता कहां जाता है ।

2. क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और इसे हम हिंदी में दीर्घकालीन किडनी विफलताा कहते हैं।
और जो भी किडनी की पीड़ा होती है वह इन्हीं के अंतर्गत आती है ।
दोस्तों किडनी खराब होने के कारण क्या है , दोस्तों पहले हम आपको आशान शब्दों में समझाएंगे ताकि आपको अच्छे से समझ आ जाए हम इन बीमारियों से महफूज रहे फिर हम इनके अल्पकालीन और दीर्घकालीन के बारे में जानेंगे एकदम बारीकी से ।
तो दोस्तों किडनी रोग कई कारणों से हो सकते हैं ।पहला कई तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करना या मधुमेह डायबिटीज और उच्च रक्तचाप भी किडनी रोग का मुख्य कारण है।
किडनी में अगर खून का पहुंचना अचानक बंद हो जाए,  या कमी आ जाए तो किडनी रोग का खतरा बढ़ जाता है।
                    खून कम पहुंचने की स्थिति में दिल का दौरा पड़ना या हार्ट फेल जैसी गंभीर समस्याएं शामिल है यह पॉलिसिस्टिक किडनी रोग हो सकता है ।

  • * दोस्तों मूत्र संबंधित समस्याओं को भी किडनी खराब होने का कारण माना गया है जब हमारा शरीर मूत्र त्याग नहीं कर पाता तो कई विषाक्त पदार्थ किडनी पर जोर डालता है।  इससे कभी-कभी यह पदार्थ मूत्रमार्ग और अन्य अंगों को रोक देते हैं जैसे- प्रोस्टेट पेट सर्वाइकल (ग्रीवा) मुद्रा से यह रोग पुरुषों में सबसे आम है।
  • इनके अलावा अन्य स्थितियों में पेशाब में रूकावट हो सकती है जिससे किडनी की रोग हो सकती है जिनमें पथरी प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना मूत्र पथ में रक्त के थक्के जमाना शामिल है।
  • *दोस्तों ल्यूपस एरिथेमेटोसस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिनमें हालात बिगड़ जाने पर रोक की सक्रियता अलग-अलग चरणों में सामने आती है जो शरीर के कई अंगों 
  • जैसे ह्रदय फेफड़े किडनी और मस्तिक क भी प्रभावित करती है‌‌।
  • दोस्तों यह किडनी में सूजन पैदा कर सकती है जिस से किडनी का रोग होने का खतरा रहता है‌।
  • जिनमें दोस्तों मल्टीपल मायलोमा अस्थि मज्जा में प्लाज्मा कोशिकाओं का एक कैंसर जैसी बीमारी भी किडनी रोग का कारण बन सकती है।
  • जिन्हें कीमोथेरेपी जैसे इलाज प्रणालियां कैंसर और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों का इलाज करती है ‌
1. अल्पकालीन किडनी विफलता (Acute kidney injury) AKI किया है ।
किडनी या (गुर्दे) कि हुई ऐसी क्षति जो कुछ निर्धारित समय कुछ घंटों या कुछ दिनों के लिए होती है। इस रोग के कारण किडनी अपना काम - रक्त से बेकार पदार्थों को अलग करना, और शरीर में पानी की मात्रा का संतुलन बनाए नहीं रख पाती। इनके मुख्य कारण है, कोई बड़ी सर्जरी, गंभीर एलर्जी, सूजन, सिरदर्द, सर्दी, फ्लू, और अन्य बीमारियों में दर्द को दूर करने के लिए दर्दनाशक दवाओं जैसे- इबुप्रोफेन, केटोप्रोफेन और नेप्रोक्सन का अधिक प्रयोग करना, दिल का दौरा, जिगर की विफलता,रक्त या पानी की कमी हो जाना, निम्न रक्तचाप (हाइपोटेंशन) या कोई सदमा सामिल है।
इनके लक्षण लोगों में कुछ अलग - अलग हो सकती हैं, लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण होते हैं।
  •     कम पेशाब आना ।
  •     पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन आना ।
  •     थकान होना ।
  •     किडनी की कार्यक्षमता में कमी आने के कारण शरीर में एसिड लोड का बढ़ना ।
  •     रक्त में पोटेशियम की अधिक मात्रा हो जाना ।
  •     फेफड़ों में पानी भर जाना (pulmonary edema)
  •     साँस फूलना । इत्यादि सामील है।
इसके अलावा इस रोग कि प्रभावपूर्णता के हिसाब से कोमा जैैसी  स्थिति भी आ सकती है।

दीर्घकालीन किडनी विफलता (Chronic  Kidney Disease) CKD किया है।
सी के डी को किडनी की गंभीर बीमारी कहा जाता है । क्योंकि यह बीमारी जल्दी से अपने लक्षण नहीं दिखाती है। तो तब, जब किडनी लगभग 70 से 80 % खराब हो चुकी होती हैं । (सी के डी) में किडनी खराब होने की Prosse बहुत धीमी होती है, जो महीनों या सालों तक चलती है। किडनी काफी रूप से, eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) ग्लोमेरुलर फिल्टरन की क्रिया करती हैै । और इसी क्रिया की दर को मापकर डॉक्टर किडनी की निष्फलता के चरण को निर्धारित करते हैं। इस स्थित मेंडॉक्टर रक्त क्रिएटिनिन परीक्षण (Blood Creatinine Test), जो आयु और आपके शरीर के रुप और लिंग के हिसाब से इसकी गणना करती है।
eGFR डॉक्टर को किडनी की विफलता के तत्काल चरण की जानकारी देता है। जो डॉक्टर को उपचार की योजना बनाने में मदद करता है।

भारत में हर साल लगभग 3,00,000 लोगों को एण्ड-स्टेज किडनी निष्फलता के अंतिम चरण का पता चलता है। उनमें से लगभग 80 प्रतिशत लोग अगले एक साल में मर जाते हैं। केवल 12-15 प्रतिशत को डायलिसिस का इलाज मिल पाता है। डायलिसिस दो प्रकार की होती हैं। 
 1. पेरिटोनियल डायलिसिस और 
2. हीमो डायलिसिस  दोनों किडनी की Failure का इलाज है।

लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण होते हैं।
  •     खाने का मन नहीं करना, उल्टी, उबकाई आना।
  •     लगातार कमजोरी महसूस होना, वजन घट जाना।
  •     बिमारी के बढ़ते-बढ़ते पूरे शरीर में सूजन आ जाना। जिकी वजह से वजन बढ़ा हुआ लगना।
  •     सुबह सो कर उठने पर आँखों के चारों तरफ और चेहरे पर सूजन मिलना।
  •     थकावट महसूस होना, साँस फूलना।
  •     खून में फीकापन और खून की कमी (एनीमिया) हो जाना।
  •     शरीर में खुजली हो जाना।
  •     पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना।
  •     रात के समय सामान्य से ज्यादा पेशाब जाना। (Nocturia)
  •     याद्दाश्त कमजोर हो जाना, नींद की आदतों में बदलाव हो जाना।
  •     दवा के बावजूद भी उच्च रक्तचाप नियत्रण में न होना।
  •     स्त्रियों के मासिक चक्र में अनियमित आना और पुरुषों में नपुंसकता का होना।
  •     किडनी में बनने वाला विटामिन ‘डी’ का कम बनना, जिसके कारण हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं।

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