कुत्ते, सूअर काट लें तो क्या करें ? या भयानक रूप से संक्रमित धाव की विशेष देखभाल और इलाज

छूतहा ( संक्रमित ) या फैलने वाला घावः 
उनकी पहचान और चिकित्सा कैसे करें : 
घाव छुतहा ( संक्रमित ) बनता है यदिः

  • उनका रंग लाल हो जायें । 
  • वह सूज जाये और उसमें दर्द होने लगे उसमें पीप पड़ जाये । 
  • या उसमें से दुर्गन्ध उठने लगे ।

यदि संक्रमण शरीर के दूसरे भागों में भी फैल रहा हो तो :

  • बुखार हो जाता है ,
  • घाव के ऊपर लाल रेखा खिच जाती है ,
  • या जब घाव लसीका गाउ ( लिम्फ नोड्स ) गर्म हो जाए और उसमें सूजन आ जाये । लसीका गाठे- इन्हें प्रायः ' ग्लॅडस ( गिल्टी ) कहकर पुकारा जाता है ये चमड़ी के अन्दर रोगाणुओं के रहने के छोटे - छोटे स्थान होते हैं और उनको छूत लगने पर छोटी - छोटी गांठ बन जाती हैं । दोस्तों ऐसे लोगों से नोर्मल आदमी दुरी बना कर रहें । 
Example

कान के पीछे की सूजी हुई लसीका गाठे सिर या सिर की खाल की संक्रमण का संकेत देती हैं , इसका कारण प्रायः फोड़े या जुएं होती हैं । कई बार जर्मन खसरा भी इसका कारण होता है ।
            कान के नीचे और गर्दन की सूजी हुई गांठेकान , चेहरे या सिर ( या क्षयरोग ) की छूत की ओर संकेत करती हैं ।
           जबड़े के नीचे की सूजी हुई गाउँदति या गले की छूत की ओर संकेत करती है ।
           कांख को सूजी हुई गांठे भुजाआ , सिर या स्तन में ( या कभी कभार स्तन कसर ) संक्रमण की ओर संकेत करती हैं । कांख की सूजी हुई गांठे टांग , पांव , जननांगों या गुदा ( मलद्वान ) के संक्रमण की ओर संकेत करती हैं ।

संक्रमित घावों की चिकित्साः

  •        घाव पर 20 मिनट तक दिन में चार बार सेक करें । सेक के लिए आप साबुन या पोटाशियम परमैंगनेट ( एक बाल्टी में एक चम्मच ) मिला गर्म पानी भी प्रयोग में ला सकते हैं ।
  • संक्रमित अंग को आराम पहुंचायें और ऊंचा रखें ( उसे हृदय की अपेक्षा ऊंचा रखें ) । 
  • यदि छूत कारूप गंभीर है या व्यक्ति को टेटनस के विरूद्धटीका नहीं लगा हुआ है तो सिलीन जेसी एंटीबायटिक दवा का प्रयोग करें ।

चेतावनी : 
         यदि घाव से दुर्गन्ध फूटती है या उसमें से भूरे अथवा मटमैले रंग का तरह पदार्थ निकलता हे या उसके आस पास की जगह काली हो गई है और वहां फफोले से बन गये हैं तो वह फोड़ा या कोथ ( गेग्रीन ) हो सकता है । उसी समय शाक्टरो सहायता ले । इसी बीच , गग्रीन के बारे में दिए गए निर्देशों का पालन करें ।

ऐसे घाव जो भयानक रूप से छूतहा ( या संक्रमित ) बन सकते हैं :

इन घावों के भयानक रूप से छूतहा बनने की आशंका है :

  • गंदे घाव या गंदी चीजों से बने घाव ।
  • किसी चीज के चुभने से बना घाव या ऐसा गहरा घाव जिसमें से ज्यादा खून न बहा हो ।
  • ऐसे स्थान पर घाव लगना जहां पशु आदि रखे जाते हों जैसे कि गाय और सूअरों को बांधने की जगह ।
  • ऐसे बड़े घाव जिनके कारण चमड़ी कट - फट गई हो ।
  • सूअर , कुत्ते अथवा मनुष्य के काटने से बने घाव गोली का घाव ‌।
  • गोली का घाव ।

इस प्रकार के ' अति खतरनाक ' घाव की विशेष देखभालः

  1. घाव को साबुन और उबले हुए पानी से अच्छी तरह से साफ करें । धूल , जमे हुए खून और बेजान या बुरी तरह से घायल चमड़ी को हटा दें । पिचकारी या चूषण गुब्बारे से घाव को अच्छी तरह धोयें ।
  2. घाव का पोटाशियम परमैगनेट वाले पानी में डुबोएं ( एक बाल्टी में एक चम्मच ) । तब घाव पर जेंशियन वायलेट लगाएं या घाव में थोड़ी सी एंटीबायोटिक मलहम लगाएं और इसको साफ पट्टी से ढक दें ।
  3. यदि घाव बहुत गहरा हे या दांत काटने से बना है या थोड़ा सा भी शक हो कि उसमें अभी भी गंदगी बाकी है तो प्रतिजीवाणु दवा का प्रयोग करें । इसके लिए सबसे अच्छी दवा एम्पिसिलीन के कैप्सूल या गंभीर मामलों में इंजेक्शन है ।

इस तरह से छूतहा घावों को टांकों या तितलीनुमा पट्टी ' से कभी भी बन्द न करें । 
इन घावों को खुला रखें । टेटनस का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिन्होंने इस जानलेवा रोग के विरूद्ध टीका नहीं लगवाया हो । जोखिम को कम करने के लिए ऐसे व्यक्ति जिसने टेटनस के विरूद्ध टीका नहीं लगवाया हो , उस व्यक्ति को इस प्रकार का घाव होने के तुरन्त बाद पेनसिलीन या एम्पिसिलीन का उपयोग अवश्य करना चाहिए चाहे घाव छोटा ही क्यों न हो ।

    दोस्तों यदि इस प्रकार का घाव काफी गंभीर है और व्यक्ति का टेटनस के विरूद्ध प्रतिरक्षित नहीं किया गया हुआ है तो उसे चोट लगने के एक सप्ताह के बाद तक या और भी ज्यादा पैनसिलीन या एम्पिसिलीन की भारी खुराक के टीके लगवाने चाहिए चाहे घाव छोटा ही क्यों न हो । टेटनस एन्टीटाक्सिन को भी प्रयोग किया जा सकता है लेकिन इसके इस्तेमाल संबंधी सारी सावधानियों की ओर पूरा ध्यान दें ।

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