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| आंख हमारे शरीर का सबसे नाजुक अंग है |
- आँखों को स्वच्छ पानी से धोकर साफ - सुथरा रखें । रात को सोने से पहले आंखों को धोना बहुत ही अच्छी बात है । इससे आंखों में पड़ी दिन भर की धूल , मैल आदि साफ हो जाती है ।
- आंखों को पोंछने के लिए हमेशा साफ - सुथरे कपड़े का इस्तेमाल करें । साड़ी , धोती या कपड़े के आस्तीन से आंखों को न पोंछे । ऐसा करने से आंखों को खतरनाक संक्रमण लग सकता है । रोहे और नेत्र श्लेष्मा शोथ रोग इसी तरह फैलते हैं।
- आंखों को पोंछने के लिए हरेक व्यक्ति को अलग कपड़ा , तौलिया या रूमाल प्रयोग करना चाहिए । यदि एक आंख में कोई संक्रमण लगा हो तो दोनों आंखों को अलग - अलग कपड़ों से साफ करें ।
- काजल ' या ' सुरमा डालते समय हरेक व्यक्ति के लिए अलग उंगली या सुरमचु सलाई ) का इस्तेमाल करें । इस्तेमाल के बाद शीशी या डिब्बी को अच्छी तरह बन्द कर दें ताकि धूल या मिट्टी आदि न पड़ने पाये ।
- आंखों को छूत लग जाये तो स्वास्थ्य कार्यकर्ता को जा कर दिखायें । सड़क छाप मजमेवालों से लिये गये सुरमे और दूसरी दवाओं को आंखों में भूलकर भी न डालें । ये चीजें लाभ पहुंचाने की बजाये व्यक्ति को दृष्टिहीन भी बना सकती हैं ।
- चौलाई , पालक , सैंजने जैसी हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां तथा पपीता और आम जैसे फल खायें । इनमें विटामिन ' ए ' होता है जो कि आंखों के लिए बहुत ही लाभदायक है । इन चीजों का इस्तेमाल करने से प्रायः रतौंधी से भी व्यक्ति बचा रहता है ।
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खतरे के लक्षण :
शरीर का कोमल अंग होने के नाते आंखों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है । यदि नीचे लिखा कोई खतरनाक लक्षण दिखाई दे तो तुरन्त डाक्टरी सहायता लें :
1. कोई ऐसा घाव जिससे नेत्र गोलक कट या फट जाये ।
2. Sphere पर भूरे रंग का पीड़ादायक दाग , इसके साथ ही Sphere के आसपास लाली भी हो ( Sphere अल्सर ) ।
3. आंख के अन्दर तीखी पीड़ा ( संभवतया आइराइटिस या सबलबाय ग्लूकोमा ) ।
4. जब आंख या सिर में पीड़ा हो , उस समय आंख के तारे का आकार बदल जाना ।
तारे के आकार में अंतर , मस्तिष्क - ति , प्रघात , आंखों को चोट लगने , सबलबाय या आइराइटिस के कारण हो सकता है । ( कुछ लोगों में आंखों के तारों का थोड़ा सा अंतर सामान्य होता है । )
2. Sphere पर भूरे रंग का पीड़ादायक दाग , इसके साथ ही Sphere के आसपास लाली भी हो ( Sphere अल्सर ) ।
3. आंख के अन्दर तीखी पीड़ा ( संभवतया आइराइटिस या सबलबाय ग्लूकोमा ) ।
4. जब आंख या सिर में पीड़ा हो , उस समय आंख के तारे का आकार बदल जाना ।
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5. यदि एक या दोनों आंखों की नजर खत्म होने लगे।
6. आंख की कोई ऐसी छूत या जलन जो 5-6 दिन प्रतिजीवाणु आंख की मलहम ( आइंटमेंट ) का प्रयोग करने के बाद भी ठीक न हो ।आंखों को चोट लगने से बचाएं :
नेत्र - गोलक को लगने वाली हर चोट खतरनाक हो सकती है , इससे दृष्टिहीनता भी हो सकती है । दीवाली आदि के दौरान पटाखों , वेल्डिंग के दौरान निकलने वाली चिंगारी , रसायनों को लापरवाही से उठाने के कारण चोट लग सकती है ।
Sphere ( पुतली या परितारिका को ढ़कने वाली पारदर्शी परत ) पर लगी छोटी से छोटी चोट को भी छूत लग सकती है और अगर उसकी सही देखभाल न की जाये तो नजर में खराबी आ सकती है ।
यदि नेत्र - गोलक में लगा घाव गहरा हो जाये तो यह स्थिति विशेष रूप से गंभीर हो सकती है ।
यदि तेज चोट ( जैसे कि मुक्का लगना ) से आंख में खून भर जाये तो समझना चाहिए कि आंख खतरे में है । यह खतरा उस स्थिति में और भी बढ़ जाता है , जब कुछ दिनों के बाद पीड़ा एकाएक बढ़ने लगे , शायद यह गंभीर सबलबाय ( ग्लुकोमा ) रोग हो सकता है ।
उपचार :
- यदि आंख में चोट लगने के बाद भी व्यक्ति उस आंख से अच्छी तरह देख सकता है तो आंख में प्रतिजीवाणु नेत्र - मलहम डालें और आंख को नर्म और मोटी पट्टी से ढक दें । यदि एक दिन में वह ठीक न हो तो डाक्टरी सहायता लें ।
- यदि आंख में चोट लगने के बाद व्यक्ति उस आंख से ठीक तरह से नहीं देख सकता , या चोट काफी गहरी हो या आंख में स्वच्छमंडल के पीछे खून हो तो आंख को साफ पट्टी से ढककर तुरन्त डाक्टरी सहायता प्राप्त करें । आंखों पर दबाव न डालें ।
- उन कांटों या किरचों को निकालने की कोशिश न करें जो दृढ़ता से नेत्र - गोलक में घुस गये हों । डाक्टरी सहायता लें ।
उम्मीद करता हूं इस जानकारी से आप को कुछ तो फायदा हुआ होगा कमेंट जरुर कीजिएगा । धन्यवाद
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