सर्दी के कारण पैदा हुई Emergency स्थितियां और लक्षण, कारण, उपचार सटीक और एक्सपर्ट सहायक लेखक

शरीर से उष्मा ( ताप ) का खत्म होना (हाइपोथर्मिया) यह खतरानाक स्थिति हैं :

ठंड के मौसम या सर्द , नम या हवादार मौसम में व्यक्ति यदि पर्याप्त गरम कपड़े नहीं पहने होता , उसके शरीर का ताप कम हो सकता है । यह खतरनाक स्थिति है । प्रायः व्यक्ति यह नहीं समझ पाता कि उसे क्या हुआ है । यह इतने भ्रम में पड़ सकता है कि मदद न मांग सके और उसकी मौत भी हो सकती है ।

लक्षण :

  • नियंत्रणहीन कंपकपाहट 
  • धीमी या अस्पष्ट आवाज 
  • लड़खड़ाते हुए चलना 
  • स्पष्ट न सोच पाना 
  • बहुत थकावट महसूस करना
उपचार :

  • व्यक्ति को तुरन्त शुष्क एवं सुरक्षित स्थान पर ले जाएं जहां शीत लहर न लगे । 
  • यदि उसके कपड़े भीगे हैं तो तुरन्त उतार कर सूखे कपड़ों से ढकें । उसे किसी गर्म कम्बल से ढक दें । 
  • यह सुनिश्चित करें कि उसका सिर , पाव और हाथ ठीक से ढके हों । 
  • एक पत्थर को आग में गर्म करें , फिर एक मोटे कपड़े में लपेट कर रख दें । इस गर्म पत्थर को उसकी छाती , पीठ और जांघों के पास रखें ।
चेतावनी :

व्यक्ति को बहुत जल्दी गर्म न करें इससे उसे हृदय की समस्या हो सकती है और उससे मौत भी ।

आप व्यक्ति को गर्म रखने के सारे उपाय करें । यदि वह बच्चा है तो आप अपने साथ लिटाकर अपने कपड़ों के भीतर करके गर्म करें । या फिर उसे अपनी बाहों में लेकर सोएं । यदि कोई अन्य है तो उसे दूसरी तरफ लिटा लें । या फिर अपनी चारपाई के नीचे जलते कोयले या कुछ छोटे दीये जलाकर रखें । ( पर ध्यान रहे कि इससे कोई जले नया तेज आंच न लगे ) । 

           उस व्यक्ति को मीठी चीज जैसे गुड , चीनी , शहद , मिठाई . पके फल या अन्य मीठे पेय दें । यदि आपके पास ये चीजे भी न हो . लो आप मांड युक्त आहार जैसे चावल , बेड , बाजरा , मक्का या आलू दें । यदि व्यक्ति कांपना बंद कर दे , फिर भी उपर्युक्त कोई एक लक्षण दिखाई दे या वह बेहोशी में हो या उसकी हालत गंभीर हो तो उसे गर्म रखने की कोशिश जारी रखें , यदि फिर भी वह न उठे ( जागे ) तो तुरन्त चिकित्सा सहायता लें ।


छोटे शिशुओं और बीमार व्यक्ति के लिए ताप का कम होना खतरनाक हो सकता है : 

              कई बार , खतरनाक जाड़े व सदी के दिनों में किसी शिशु या बीमार बच्चे या बहुत बूढ़े व्यक्ति , बीमार या कुपोषित व्यक्ति के शरीर का ताप यदि बहुत कम हो जाए तो पहले के पृष्ठ में बताए गए लक्षण उभर सकते हैं और व्यक्ति की मौत भी हो सकती है । शरीर को गर्म रखकर शरीर के ताप को ऊँचा उठाने की कोशिश कीजिए ।

हिभीकृत त्वचा ( फ्रॉस्टबाइट ) :

बफोलो हवाओं वाले मौसम में यदि व्यक्ति ने ठीकाप्त कपड़े न पहने हो उसने अपने हाथ पांव , कान या चेहरा न ढका हो तो वे कभी - कभी जमना ( हिमीकृत ) शुरू हो जाते हैं । यदि पूरी तरह जम जाए तो त्वचा मृत हो सकती है और बाद में काली हो जाए । हो सकता है वह अंग काटना भी पड़े ।

हिमीकरण ( जमने ) के लक्षणः

  • सबसे पहले . शरीर के किसी अग पर ठंड से सुनाहट और प्रायः तेज दर्द होता है । 
  • जब सारा अंग हिमीकृत हो जाता है तो सारी महसूस होने वाली शक्ति खत्म हो जाती है । 
  • सारा अंग पीला पड़ जाता है और छूने में सख्त हो जाता है ।

साधारण हिमीकरण ( जमने ) का उपचारः 

यदि छूने में त्वचा नर्म है तो व्यक्ति के अंग पर साधारण हिमीकरण हुआ है । सूखे कपड़े को उस अंग पर लपेटिए और व्यक्ति के स्वयं के शरीर के साथ लगाकर गर्म कीजिए । कोई दूसरा भी ऐसा कर सकता है । उसको गतिमान करने की कोशिश करते रहें और जितना जल्द हो सके , उसकी ठंड दूर करें ।

गंभीर हिमीकरण का उपचारः

सावधानः गंभीर हिमीकरण का उपचार तब तक न शुरू करें जब तक कि आप ऐसी जगह पर न हों , जहां व्यक्ति का सारा शरीर उपचार में और उपचार के बाद गर्म रखा जा सके । यह ज्यादा बेहतर होगा कि उस हाथ या पाव को हिमीकृत ही बना रहने दैन कि एक बार गर्म करें और फिर हिमीकृत हो जाने हैं । जब आपको गरम सुरक्षित स्थान मिले तो आप निम्न उपाय कर सकते हैं :

  • गुनगुने पानी ( गर्म नहीं ) का टब भरें और उसमें प्रभावित अंग डाले ।
  • जब तक गर्म न हो तब तक व्यक्ति का प्रभावित अंग डुबोए रखें ।
  • यदि पानी ठंडा होने लगे तो उसमें थोड़ा और गर्म पानी मिलाएं । परन्तु जब गर्म पानी डालें तो व्यक्ति का अंग बाहर निकाल लें । याद रहे , उसको महसूस नहीं होता कि पानी कितना गर्म है और आपकी असावधानी से वह जल भी सकता है
  • जैसे ही वह गर्म होने लगेगा , जमे हुए भाग में दर्द होगा । उसे एस्प्रिन या कोडीन दें ।
  • वह आगे हिमीकृत न हों अतः व्यक्ति को गर्म एवं आराम देय स्थिति में रखें ।
  • हिमीकृत अंग के साथ बहुत नरमी बरतें । उस का उपचार गंभीर घाव या जलना जेसा करें ।
  • तुरन्त चिकित्सा सहायता प्राप्त करें । कभी - कभी इस प्रकार के हिमीकृत भाग या अंग को शल्यक्रिया द्वारा शरीर से अलग भी करना पड़ता है ।
धन्यवाद !

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