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| आयरिश |
मानव आंख जो हमारे शरीर का सबसे नाजुक और बहुत ही उपयोगी अंग है।
आंख किसी कैमरा की तरह ही काम करती है, और कैमरा में तीन मुख्य भाग होते हैं। वह कैमरा है जो आपके शरीर में ही मौजूद है.....
1. लेंस या प्रकाशीय यन्त्र जो प्रकाश को एकत्रित कर तस्वीर बनाता है ।
आंख के कॉर्निया के पीछे आइरिस होती है। आइरिस में आई सूजन को आयराइटिस कहते हैं।
आयराइटिस के बहुत से कारण होते है, जैसे टीबी, लेप्रोसी, सिफलिस, बैक्टीरियल इंफेक्शन। कुछ मरीजों में तो कारण का पता भी नहीं लग पाता।
आइराइटिस ( परितारिका की जलन )
लक्षण :
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| तारा छोटे हुआ पराया गोलाई में पूरा नहीं होता, परितारिका के आसपास लाली तीखी पीड़ा |
पीड़ा एकाएक या धीरे - धीरे शुरू हो सकती है । आंखों से काफी ज्यादा पानी बहता है । तेज रोशनी में तकलीफ बढ़ जाती है । नजर अक्सर अस्पष्ट हो जाती है ।
यह आपात स्थिति है । प्रतिजीवाणु मलहम कोई लाभ नहीं पहुंचाती । डाक्टरी सहायता लें ।
सबलबाय ( ग्लुकोमा )
इस खतरनाक बीमारी का कारण आंखों में अधिक दबाव होता है । यह प्रायः 40 वर्ष से ज्यादा आयु वाले लोगों को होता है और इस आयु के लोगों के दृष्टिहीनता का यह आम कारण है ।
दृष्टिहीनता से बचने के लिए यह जरूरी है कि सबलबाय को शुरू से ही पहचान कर तत्काल डाक्टरी सहायता ली जाय ।
सबलबाय के दो प्रकार हैं :
1. गम्भीर सबलबाय :
यह सिरदर्द या आंख के तेज दर्द के साथ एकाएक शुरू होता है । आंख लाल हो जाती है , नजर धुंधला जाती है । नेत्र - गोलक छूने से कड़ा अनुभव होता है जैसे कि पत्थर हो । उल्टी भी हो सकती है ।
प्रभावित आंख का तारा सामान्य आंख के तारे से बड़ा हो जाता है ।
यदि इलाज बहुत जल्दी न किया जाये तो कुछ ही दिनों में गंभीर सबलबाय दृष्टिहीनता में बदल जाता है । प्रायः सर्जरी की जरूरत पड़ती है ।
तुरन्त डाक्टरी सहायता लें ।
2. दीर्घकालीन सबलबाय :
आंखों में दाब धीरे - धीरे बढ़ता जाता है । आंखों में प्रायः पीड़ा नहीं होती । नजर धीरे - धीरे खराब हो जाती है लेकिन इसका पता नहीं चलता , क्योंकि यह दृष्टि दोष आंख के कोने से शुरू होकर बढ़ता जाता है । कोनों की दृष्टि की जांच करने से बीमारी का पता लगाया जा सकता है ।
सबलबाय की जांच
व्यक्ति की एक आंख बंद करवा दें और दूसरी आंख को ठीक सामने वाली चीज को देखने दें । उस बात की जांच करें कि सिर के पीछे से सामने की तरफ आती उंगलियों को वह कब देख सकता है ।
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| सामान्य रुप से उंगलियों को पहले यहां देखा जा सकता है। सबलबाय में उंगलियों की चाल पहले यहां तक आती है और बाद में लगातार आगे को बढ़ाती रहती है। |
यदि इस रोग का जल्दी पता चल जाये , विशेष आई ड्रॉप्स ( पिलोकारपाइन या टिनोलाल आई ड्राप ) से उपचार किया जाये तो दृष्टिहीनता से बचा जा सकता है ।
खुराक का निश्चय डाक्टर या स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा ही किया जाना चाहिए , क्योंकि वह समय समय पर आंखों पर पड़ने वाले दाब की जांच कर सकता है । आंखों में डालने वाली दवा का जीवन भर प्रयोग अवश्य करना चाहिए ।
बचाव :
जिन लोगों की आयु 40 वर्ष से ज्यादा है या जिनके रिश्तेदारों को सबलबाय रोग है , उन्हें साल में एक बार अपनी आंखों केदाब की जांच जरूर करवानी चाहिए ।
आंसू ग्रंथी की छूत ( डेक्राइयोसिस्टाइटिस )
लक्षण :
नाक के पास आंख के नीचे लाली , पीड़ा और सूजन । आंख से काफी ज्यादा मात्रा में पानी बहता है । यदि सूजन को धीरे से दबाया जाये तो पीप का एक कतरा आंख के कोने में उभर आता है ।
उपचार :
- गर्म पानी से सेंका करें ।
- आंख में प्रतिजीवाणु दवा की बुंद या मलहम (आंइटमेंट) डाले ।
- योजनाबद्ध एंटीबायोटिक लें ।
- ऊपर बताए उपचार से कोई फायदा न हो तो सर्जरी करवाएं ।





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