खांसी, सूखी खांसी या घरघराहट अथवा खांसी में खून आना घरेलू उपचार


खांसी अक्सर होने वाली शिकायत है । खांसी अपने - आप में कोई रोग नहीं है लेकिन यह दूसरे कई ऐसे रोगों का एक लक्षण है जो गले , फेफड़ों या वायु - नलिकाओं ( फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली नलिकाएं ) पर प्रभाव डालते हैं । नीचे कुछेक , समस्याएं दी जा रही हैं जिनसे विभिन्न प्रकार की खांसी होती है ।
सूखी खांसी- जिसमें बलगम बिल्कुल नहीं आता या थोड़ा - सा ही आता है ।
  • सर्दी - जुकाम या फ्लू कृमि जब फेफड़ों में से गुजर रहे हो
  •     खसरा 
  • धूम्रपान करने वाले को खांसी 

काफी अथवा धोड़ी बलगम वाली खासी


श्वासनली शोथ र्बोकाइटिस
       निमोनिया
फेफड़े का व्रण / दमा

ऐसी खांसी जिसमें घरघराहट या खाय - खाय की आवाज आती होया सांस लेने में कठिनाई हो :

  •      दमा 
  •     काली खासी 
  •     डिप्थीरिया 
  •     हृदय रोग

चिरकारी ( दीर्घकालीन ) या लगातार होने वली खांसी

  •         तपेदिक 
  •       धूम्रपान करने वालों की खांसी
  •         या साधारण खांसी 
  •            दमा ( बार - बार होने वाला दौरा ) 
  •      चिरकारी ( दीर्घकालीन ) श्वासनली शोथ 
  •         वात - स्फीत ( एम्फीसेमा ) 



खांसी में खून आना

                    तपेदिक

               निमोनिया ( पीला , हरा या खून से सना                               बलगम

                 गंभीर कृमि - छूत


खांसी शरीर का श्वास प्रणाली को साफ करने और बलगम ( पीप रंजित रैंट ) तथा गले अथवा फेफड़ों में जीवाणुओं / रोगाणुओं से छुटकारा पाने का तरीका है । अतः जब खांसी बलगम पैदा करने लगे तो खांसी को रोकने के लिए दवा मत लें बल्कि इसके स्थान पर बलगम को ढीला करने और बाहर निकालने के लिए कुछ करें ।

खांसी की चिकित्सा या उपचार :


1. बलगम को ढीला करने और खांसी से आराम पाने के लिए पानी की ज्यादा से ज्यादा मात्रा पीएं । किसी भी दवा से यह अधिक लाभ पहुंचाता है ।
                   खोलते हुए पानी की भाप भी सूंघे । कुर्सी पर बैठकर गर्म पानी की बाल्टी को पांवों के पास रख लें । अपने सिर को एक कपड़े से ढक लें जो कि बाल्टी के चारों ओर भी लपेटा हो ताकि बाल्टी में से उठती हुई भाप सीधे आपके नाक - मुंह को छुए । 15 मिनट तक इस भाप के गहरे - गहरे सांस लें । दिन में कई बार यही क्रिया करें । कुछ लोग पानी में पुदीना , सफेदे के पत्ते , वेपोरब डालना पसन्द करते हैं , लेकिन केवल गर्म पानी का भी उतना ही लाभ होता है ।
                यदि व्यक्ति को दमा हो तो वेपोरब का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए ।

2. सभी तरह की खांसी , विशेष रूप से सूखी खासी के लिए निम्नलिखित मिश्रण दिया जा सकता है :

निम्न मिश्रण हर 2-3 घंटे के बाद चाय का एक चम्मच भर लें । छोटे बच्चों और उन लोगों जिन्हें सांस लेने में कठिनाई हो . को यह मिश्रण दें और उसमें शराब न मिलाएं ।
3. ऐसी सूखी खांसी ( बिना बलगम वाली ) जो आपको सोने न दें के लिए : कोडीन के साथ खांसी का शर्बत अथवा क्लोरल हाइड्रेट का मिश्रण ले सकते हैं । यदि काफी मात्रा में बलगम हो या खांसी के साथ घरघराहट की आवाज आती हो कोडीन का इस्तेमाल न करें । कोडीन के साथ एस्प्रिन की गोलियां ( अकेले एस्प्रिन भी ) मिलाने से भी मदद मिलती है । 
4. घरघराहट वाली खांसी के कठिन और आवाज पैदा करने वाली सांस हो तो दमा , दीर्घकालीन ( चिरकारी ) श्वासनली शोथ ( ब्रांकाइटिस ) और हृदय रोग । 
5. यह पता लगाने की कोशिश करें कि कौन - सी बीमारी खांसी पैदा कर रही है और उसका इलाज करें । यदिखांसी लंबे समय तक रहती है , यदि उसमें खून , पीब अथवा इसमें बदबूदार बलगम हो अथवा यदि व्यक्ति का वजन कम हो रहा हो अथवा सांस लेने में लगातार तकलीफ हो रही हो , तो स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पास जाएं । 
6. यदि आपको किसी भी तरह की खांसी है तो धूम्रपान न करें । धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है ।

चेतावनी :
  •       खांसी से बचने के लए धूम्रपान न करें ।
  • खांसी का उपचार / ठीक करने के लिए खांसी पैदा करने वाले रोग का उपचार करें तथा धूमपान न करें । 
  • खांसी को शांत करने और बलगम को ढीला करने के लिए काफी मात्रा में पानी पीयें - धूम्रपान न करें ।
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