कलायखंज :
यह रोग ज्यादा मात्रा में केसरी दाल खाने से होता है । केसरी दाल को उगने के लिए बहुत थोड़े पानी की जरूरत होती है और यह शुष्क क्षेत्रों में अच्छी तरह से उगती है । यह दाल अन्य दालों से सस्ती होती है ।
केसरी दाल मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ भागों में उगाई जाती है , इन क्षेत्रों में इस दाल को मजदूरी के रूप में दिया जाता है । इसलिए यह रोग उन लोगों में ज्यादा पाया जाता है जो मजदूरों के रूप में काम करते हैं ।
कलायखंज तंत्रिका प्रणालीको प्रभावित करता है । सबसे पहले , प्रभावित व्यक्ति अपनी टांगें सीधी नहीं कर सकता । कड़ापन धीरे - धीरे तब तक बढ़ता जाता है जब तक व्यक्ति चलने में असमर्थ नहीं हो जाता । अंत में उसके निचले अंग गतिहीन हो जाते हैं । जब ये लक्षण दिखने शुरू हो जाएं तो इस रोग का कोई इलाज नहीं होता ।
कलायखंज को कैसे रोका जाए :
- भिगोना - काफी मात्रा में पानी को उबालें । दाल को इस गर्म पानी में 2 घंटे तक भिगोएं । पानी को बाहर निकालदें और दाल को ठंडे पानी से धोएं । इसको धूप में सुखाएं ।
- उसनना - केसरी दाल को पानी में 12 घंटे तक भिगोएं । तब दाल को आधे घंटे तक भाप दें । इसके बाद इसे एकघंटेके लिए ठंडे पानी में भिगोएं ।




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