यह अध्याय बूढ़े लोगों की समस्याओं से बचने व उनका उपचार करने से संबंधित है ।
दूसरे अध्यायों में चर्चित समस्याओं का संक्षेप नजर की समस्याएं ( देखिए पृष्ठ 271 )
40 वर्ष की आयु के बाद बहुत से लोगों को नजदीक की चीजें देखने में कठिनाई होती है । उनकी दूर की नजर ठीक होती है । ऐसे नजर की ऐनक लाभदायकही है ।
40 वर्ष से ज्यादा आयु के सभी व्यक्तियों को सबलबाय ( ग्लुकोमा ) के लक्षणों की जांच करवानी चाहिए क्योंकि यदि इसका इलाज न किया जाये तो इससे अंधापन भी हो सकता है ।
जिस व्यक्ति में भी सबलबाय के लक्षण दिखाई दें ( पृष्ठ 272 ) , उसे तुरन्त डाक्टरी सहायता लेनी चाहिए । मोतियाबिंद ( पृष्ठ 272 ) और आंखों के सामने धब्बे उड़नाङ ( छोटी - छोटी चीजें घूमना पृष्ठ 273 ) भी बुढ़ापे की समस्याएं हैं ।
कमजोरी , थकान और खान - पान की आदतः
याददाश्त घटना व अजीब व्यवहार ;
बूढ़े लोगों की याददाश्त कमजोर हो जाती है और व भ्रमित हो जाते हैं तथा अजीब व्यवहार करते हैं । इस अवस्था के लिए कोई उपचार नहीं है लेकिन एक संतुलित आहार तथा परिवारीजनों की सही देखभाल , प्यार , दया , सहानुभूति और धैर्य से बूढ़े व्यक्तियों के दिमाग की हालत को बिगड़ने से बचाया जा सकता है । कई बार संभ्रम तेजी से प्रकट होता है और त्वचा शुष्क एवं दरारों भरी हो सकती है । यह खराब पोषण से होता है खासकर यदि आहार में चावल या मक्का की मात्रा ज्यादा हो इसके साथ ही कभी - कभी वृद्ध व्यक्ति अचानक संभ्रम का शिकार हो जाए जो कि उच्चताप को बुखार के साथ किसी संक्रमण के कारण हो सकता है ।
पावों की सूजन ( देखिए पृष्ठ 211 )
पावों की सूजन कई रोगों के कारण हो सकती है । लेकिन बूढ़े लोगों को यदि यह हो तो इसका आम कारण अपर्याप्त रक्त - संचार ( देखिए पृष्ठ 259 ) या हृदय रोग ( देखिए पृष्ठ 394 ) होता है । कारण जो भी हो , लेकिन पांवों को ऊंची जगह पर रखना लाभदायक होता है । चलने - फिरने से भी लाभ होता है । लेकिन ज्यादा समय तक एक ही जगह पर खड़े रहना या पांव नीचे करके नहीं बैठना चाहिए । जब भी संभव हो , पांव ऊपर करके बैठे ।



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